केंद्र की मंजूरी के बाद ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की प्रक्रिया शुरू

केंद्र की मंजूरी के बाद ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की प्रक्रिया शुरू

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। इस मंजूरी के साथ संविधान के तहत नाम परिवर्तन की औपचारिक प्रक्रिया का एक अहम चरण पूरा हो गया है। यह कदम 2024 में राज्य विधानसभा द्वारा पारित सर्वसम्मत प्रस्ताव के अनुरूप उठाया गया है, जिसमें संविधान में मलयालम नाम ‘केरलम’ को मान्यता देने की मांग की गई थी।

कैबिनेट की स्वीकृति और संवैधानिक प्रक्रिया

मंत्रिमंडल के निर्णय के बाद राष्ट्रपति को संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत प्रक्रिया प्रारंभ करने का अधिकार मिलेगा। प्रस्तावित ‘केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026’ को अब राज्य विधानसभा के विचार के लिए भेजा जाएगा।

अनुच्छेद 3 संसद को किसी भी राज्य के नाम, क्षेत्र या सीमाओं में परिवर्तन करने का अधिकार देता है, बशर्ते संबंधित राज्य की विधानसभा से परामर्श किया जाए। विधानसभा की राय प्राप्त होने के बाद केंद्र सरकार राष्ट्रपति की अनुशंसा पर संसद में विधेयक प्रस्तुत करेगी। इस प्रस्ताव की जांच गृह मंत्रालय द्वारा की गई है तथा विधि एवं न्याय मंत्रालय से विधिक अनुमोदन प्राप्त किया गया है।

विधानसभा प्रस्ताव की पृष्ठभूमि

24 जून 2024 को राज्य विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संविधान की प्रथम अनुसूची में संशोधन कर ‘केरल’ के स्थान पर ‘केरलम’ नाम दर्ज करने का आग्रह किया था। राज्य सरकार का तर्क है कि ‘केरलम’ राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को अधिक सटीक रूप से अभिव्यक्त करता है, क्योंकि मलयालम भाषा में राज्य का नाम यही है।

1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत भाषाई आधार पर केरल का गठन हुआ था। इस दिन को प्रतिवर्ष ‘केरल पिरवी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।

सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व

नाम परिवर्तन का यह प्रस्ताव केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ा है। यह राज्य की भाषाई विरासत और क्षेत्रीय गौरव को रेखांकित करता है। विधानसभा चुनावों से पहले इस निर्णय को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मंत्रिमंडल की स्वीकृति के साथ अब यह प्रक्रिया अगले संवैधानिक चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां राज्य विधानसभा की राय के बाद संसद में विधेयक पेश किया जाएगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

* संविधान का अनुच्छेद 3 राज्यों के नाम, क्षेत्र और सीमाओं में परिवर्तन से संबंधित है।
* संविधान की प्रथम अनुसूची में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची दी गई है।
* केरल का गठन 1 नवंबर 1956 को राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 के तहत हुआ था।
* ऐसे विधेयक को संसद में पेश करने से पहले राष्ट्रपति संबंधित राज्य की विधानसभा से राय मांगते हैं।

यदि संसद से विधेयक पारित होकर राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त हो जाती है, तो संविधान में ‘केरलम’ आधिकारिक नाम के रूप में दर्ज हो जाएगा। यह कदम राज्य की भाषाई पहचान को संवैधानिक मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाएगा।

Originally written on February 25, 2026 and last modified on February 25, 2026.

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