केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल द्वारा आयोजित वन्दे मातरम् कोस्टल साइक्लोथॉन 2026 का विस्तृत विश्लेषण
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने आज “वन्दे मातरम् कोस्टल साइक्लोथॉन 2026” के दूसरे संस्करण का आयोजन किया, जो तटीय सुरक्षा, देशभक्ति और सामूहिक चेतना को बढ़ावा देने वाला एक प्रमुख राष्ट्रीय स्तर का पर्व है। इस 25 दिवसीय यात्रा को नई दिल्ली से आभासी रूप से गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय द्वारा हरी झंडी दिखाकर राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया गया। यह कार्यक्रम “वन्दे मातरम्” के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में पूरे देश में मनाए जा रहे कार्यक्रमों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह अगले महीने 22 तारीख तक जारी रहेगा।
कार्यक्रम का थीम और राष्ट्रीय महत्व
इस वर्ष के साइक्लोथॉन का थीम “सुरक्षित तट, समृद्ध भारत” रखा गया है, जो यह दर्शाता है कि सुरक्षित समुद्र तट और तटीय क्षेत्रों का सीधा संबंध राष्ट्रीय समृद्धि और विकास से है। मंत्री नित्यानंद राय ने अपने संबोधन में कहा कि यह पहल देशभक्ति के मूल्य को उत्सवमय रूप में मनाने के साथ-साथ राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में भी मदद करेगी। 150 वर्ष पुरानी “वन्दे मातरम्” भावना को जीवंत करते हुए यह कार्यक्रम स्थानीय समुदायों, युवाओं और सुरक्षा हितधारकों को जोड़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
यह अभियान तटीय जनसंख्या के बीच एकता, जागरूकता और राष्ट्रीय आत्मगौरव की भावना को मजबूत करने के उद्देश्य से सार्वजनिक जुड़ाव का एक सशक्त माध्यम है।
CISF की तटीय और समुद्री सुरक्षा में भूमिका
गृह राज्य मंत्री ने CISF की आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में योगदान की सराहना करते हुए बताया कि बल को अंतर्राष्ट्रीय जहाज और बंदरगाह सुरक्षा कोड (ISPS Code) के तहत मान्यता प्राप्त सुरक्षा बल के रूप में स्वीकार किया गया है। यह मान्यता इस बात का प्रतीक है कि CISF अब समुद्री सुरक्षा, पोर्ट सुरक्षा और तटीय संरचनाओं की सुरक्षा में भी एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। CISF की यह भागीदारी समुद्री व्यापार, तटीय अवसंरचना और पोर्ट-आधारित विकास को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देती है।
बल के इन दायित्वों ने भारत के तटीय आयामों को सुरक्षा, विकास और आर्थिक समृद्धि की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
कार्यक्रम का मार्ग, सहभागिता और पहुंच
इस साइक्लोथॉन में दो CISF साइक्लिंग टीमें एक साथ यात्रा आरंभ करेंगी — एक पूर्वी तट पर बखाली (पश्चिम बंगाल) से और दूसरी पश्चिमी तट पर लखपत किले (गुजरात) से। ये टीमें लगभग 6,500 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए अपने समापन बिंदु कोछि (केरल) तक पहुंचेंगी। इस कार्यक्रम में कुल 148 CISF कर्मी शामिल हैं, जिनमें 65 महिलाएं भी शामिल हैं, जिसे बल के भीतर समावेशन और लैंगिक प्रतिनिधित्व को दर्शाता है।
यह आयोजन न केवल सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए है, बल्कि यह स्वास्थ्य, अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली को भी बढ़ावा देता है—विशेष रूप से युवाओं में।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- CISF भारत के गृह मंत्रालय के अधीन एक केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल है और इसका गठन 1969 में हुआ था।
- साइक्लोथॉन “वन्दे मातरम्” के 150 वर्ष पूरे होने के राष्ट्रीय उत्सव का हिस्सा है।
- CISF को अंतर्राष्ट्रीय शिप और पोर्ट सुविधा सुरक्षा कोड (ISPS Code) के तहत मान्यता प्राप्त सुरक्षा बल के रूप में स्वीकार किया गया है।
- 2026 के साइक्लोथॉन का थीम “सुरक्षित तट, समृद्ध भारत” है।
यह साइक्लोथॉन न केवल तटीय सुरक्षा के महत्व को रेखांकित करता है, बल्कि समुद्री सीमाओं की सुरक्षा, स्थानीय समुदायों की भागीदारी, और समृद्ध भारत के दिशान्त को भी स्पष्ट रूप से उजागर करता है। यह कार्यक्रम सामूहिक सुरक्षा की भावना, फिटनेस और राष्ट्रीय जिम्मेदारी की साझा भावना को सुदृढ़ करने के लिए एक प्रेरणा स्रोत के रूप में कार्य करता है, जो देश के युवाओं और नागरिकों को एक सुरक्षित और समृद्ध भारत के निर्माण में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित करता है।