कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा: PoSH अधिनियम और सरकारी पहल
भारत सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कई विधायी और नीतिगत उपाय लागू किए हैं, जिनमें कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (PoSH Act) प्रमुख है। यह कानून महिलाओं को सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करने और उत्पीड़न की शिकायतों के प्रभावी निवारण के लिए बनाया गया है। यह सभी महिलाओं पर लागू होता है, चाहे वे किसी भी आयु, रोजगार स्थिति या क्षेत्र से जुड़ी हों।
PoSH अधिनियम, 2013 के प्रमुख प्रावधान
इस अधिनियम के तहत नियोक्ताओं के लिए यह अनिवार्य है कि वे कार्यस्थल को यौन उत्पीड़न से मुक्त और सुरक्षित बनाएं। जिन संस्थानों में 10 से अधिक कर्मचारी हैं, वहां आंतरिक समिति (Internal Committee) का गठन आवश्यक है, जो शिकायतों की जांच और निवारण करती है। छोटे संस्थानों या नियोक्ता से जुड़े मामलों में जिला स्तर पर स्थानीय समितियां (Local Committees) बनाई जाती हैं। सरकार इन प्रावधानों के क्रियान्वयन की निगरानी करती है और मामलों का रिकॉर्ड भी रखती है।
मिशन शक्ति और सहायता तंत्र
मिशन शक्ति योजना के अंतर्गत सरकार महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाती है। वन स्टॉप सेंटर (OSC), जो 2015 से संचालित हैं, महिलाओं को एक ही स्थान पर चिकित्सा सहायता, कानूनी मदद, आश्रय और परामर्श जैसी सेवाएं प्रदान करते हैं। वर्तमान में देशभर में 926 से अधिक केंद्र कार्यरत हैं, जिन्होंने 13 लाख से अधिक महिलाओं की सहायता की है। इसके अलावा, 15,000 से अधिक पुलिस स्टेशनों में महिला हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं।
हेल्पलाइन और डिजिटल प्लेटफॉर्म
महिलाओं के लिए आपातकालीन सहायता सेवाएं जैसे महिला हेल्पलाइन-181 और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम (ERSS-112) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन सेवाओं ने करोड़ों कॉल्स को संभालते हुए लाखों महिलाओं की सहायता की है। जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया मिशन शक्ति पोर्टल बचाव, सुरक्षा और पुनर्वास सेवाओं को एकीकृत करता है। इसके अलावा, SHe-Box पोर्टल कार्यस्थल पर उत्पीड़न की शिकायत दर्ज करने और उसकी स्थिति ट्रैक करने के लिए एक केंद्रीकृत मंच प्रदान करता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- PoSH अधिनियम, 2013 के तहत 10 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में आंतरिक समिति अनिवार्य है।
- छोटे संस्थानों के लिए जिला स्तर पर स्थानीय समितियां बनाई जाती हैं।
- वन स्टॉप सेंटर महिलाओं को एकीकृत सहायता सेवाएं प्रदान करते हैं।
- महिला हेल्पलाइन-181 और ERSS-112 देशभर में आपातकालीन सहायता उपलब्ध कराते हैं।
जागरूकता और संस्थागत सहयोग
राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्य स्तरीय संस्थाएं जागरूकता अभियान, कार्यशालाएं और मीडिया के माध्यम से महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करती हैं। नियोक्ताओं के लिए भी यह अनिवार्य है कि वे कर्मचारियों और आंतरिक समिति के सदस्यों के लिए नियमित प्रशिक्षण और संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित करें।
अंततः, PoSH अधिनियम और उससे जुड़ी सरकारी पहलें महिलाओं के लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और समान अवसर वाला कार्य वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं, जो सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है।