कामाख्या रोपवे परियोजना: असम में आध्यात्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयों की ओर ले जाती पहल
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा है कि गुवाहाटी स्थित प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर के लिए प्रस्तावित रोपवे परियोजना धार्मिक पर्यटन को सशक्त बनाने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगी। यह परियोजना लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर तक की पहुंच को सुगम बनाने, भीड़-भाड़ को कम करने और समग्र तीर्थ अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है।
₹213 करोड़ की मंजूरी: तीर्थ यात्रा को मिलेगा सहज विकल्प
मुख्यमंत्री द्वारा सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, ₹213 करोड़ की लागत वाली कामाख्या रोपवे परियोजना को सरकार की मंजूरी मिल चुकी है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा। यह रोपवे गुवाहाटी रेलवे स्टेशन और नीलाचल पर्वत पर स्थित मंदिर के बीच एक निर्बाध वैकल्पिक परिवहन सुविधा प्रदान करेगा, जिससे यात्रा समय में भारी कमी आएगी और संकरे, भीड़भरे पहाड़ी मार्गों पर निर्भरता घटेगी।
शक्तिपीठ तक आसान पहुंच: श्रद्धालुओं के लिए वरदान
कामाख्या मंदिर नीलाचल पर्वत की चोटी पर स्थित है, जो ब्रह्मपुत्र नदी को निहारता है। यह भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और देवी कामाख्या को समर्पित है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन हेतु आते हैं, विशेषकर अंबुबाची मेले के दौरान, जो पूर्वोत्तर भारत का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है। बढ़ती भीड़ ने सड़क परिवहन पर अत्यधिक दबाव डाल दिया है, जिससे वैकल्पिक, सुरक्षित और सुविधाजनक पहुंच एक प्राथमिकता बन गई है।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था में योगदान
कामाख्या मंदिर सिर्फ धार्मिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि पर्यटन की दृष्टि से भी असम के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मंदिर गुवाहाटी के अलावा ब्रह्मपुत्र नदी पर्यटन और काज़ीरंगा जैसे प्रमुख स्थलों तक पहुंच के लिए प्रवेश द्वार की तरह कार्य करता है। अधिकारियों के अनुसार, रोपवे विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों और पर्यटकों के लिए एक सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और कुशल परिवहन विकल्प प्रदान करेगा, जिससे असम को एक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक गंतव्य के रूप में नई पहचान मिलेगी।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कामाख्या मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है।
- कामाख्या रोपवे परियोजना की स्वीकृत लागत ₹213 करोड़ है।
- नीलाचल पर्वत गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे स्थित है।
- अंबुबाची मेला असम का एक प्रमुख वार्षिक धार्मिक आयोजन है।
आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की सरकारी रणनीति
यह परियोजना असम सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत राज्य को एक प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। रोपवे के संचालन में आने के बाद न केवल यातायात दबाव कम होगा, बल्कि श्रद्धालुओं की पहुंच और अनुभव भी बेहतर होगा। इसके साथ ही कामाख्या मंदिर क्षेत्र पूर्वोत्तर भारत में एक अग्रणी तीर्थ स्थल के रूप में और अधिक सशक्त हो उठेगा।
कामाख्या रोपवे परियोजना धार्मिक पर्यटन को सुलभ, सुरक्षित और समावेशी बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास है, जो असम की सांस्कृतिक समृद्धि और तीर्थ परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने में मददगार सिद्ध होगा।