काजीरंगा में फिशिंग कैट की मजबूत मौजूदगी, वैज्ञानिक आकलन में 57 की पहचान

काजीरंगा में फिशिंग कैट की मजबूत मौजूदगी, वैज्ञानिक आकलन में 57 की पहचान

भारत में पहली बार किए गए वैज्ञानिक आकलन में काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान एवं टाइगर रिजर्व को वैश्विक स्तर पर संवेदनशील ‘फिशिंग कैट’ (Prionailurus viverrinus) का प्रमुख गढ़ बताया गया है। यह अध्ययन अखिल भारतीय बाघ गणना के दौरान लगाए गए कैमरा ट्रैप चित्रों के विश्लेषण पर आधारित है। सर्वेक्षण में रिजर्व के 450 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में 57 विशिष्ट फिशिंग कैट की पहचान की गई। यह निष्कर्ष 22 फरवरी, ‘फिशिंग कैट डे’ के अवसर पर प्रकाशित किए गए। अध्ययन काजीरंगा के टाइगर सेल और फिशिंग कैट प्रोजेक्ट के सहयोग से किया गया।

भारत में फिशिंग कैट की स्थिति

फिशिंग कैट को अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में ‘वulnerable’ श्रेणी में रखा गया है। भारत में इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची–I के तहत सर्वोच्च सुरक्षा प्राप्त है। यह प्रजाति आर्द्रभूमि, बाढ़ मैदान, मैंग्रोव और दलदली क्षेत्रों में निवास करती है और जलीय शिकार में विशेषज्ञ मानी जाती है।

असम में इसे स्थानीय रूप से “मेसिका” कहा जाता है और लोककथाओं में यह पारिस्थितिक स्वास्थ्य का प्रतीक मानी जाती है। अध्ययन के अनुसार, काजीरंगा में इसकी स्वस्थ और प्रजननशील आबादी व्यापक रूप से फैली हुई है। हालांकि, शोधकर्ताओं का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि कैमरा ट्रैप का जाल मुख्यतः बाघों के लिए डिजाइन किया गया था।

प्रमुख आवास क्षेत्रों में जनसंख्या प्रवृत्ति

फिशिंग कैट प्रोजेक्ट के आंकड़ों के अनुसार, तराई बाढ़ मैदान परिदृश्य में काजीरंगा में इसकी सर्वाधिक आबादी पाई गई है। उत्तर प्रदेश के किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य और दुधवा राष्ट्रीय उद्यान, उत्तराखंड के पीलीभीत टाइगर रिजर्व, उत्तर प्रदेश के कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य और बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व भी इसके महत्वपूर्ण मीठे जल आवास हैं।

ज्वारीय (एस्टुअराइन) पारिस्थितिक तंत्रों में पश्चिम बंगाल का सुंदरबन टाइगर रिजर्व सबसे बड़ी ज्ञात आबादी का समर्थन करता है। इसके बाद ओडिशा की चिलिका झील और भितरकनिका राष्ट्रीय उद्यान तथा आंध्र प्रदेश का कोरिंगा वन्यजीव अभयारण्य प्रमुख हैं।

आर्द्रभूमि विशेषज्ञ और चुनौतियां

फिशिंग कैट कुछ गिनी-चुनी बिल्ली प्रजातियों में से एक है जो जलीय वातावरण के लिए विशेष रूप से अनुकूलित है। यह गीली घासभूमि, उथले बील, नम घास के मैदान और वनों पर निर्भर करती है, जो बाढ़ के दौरान आश्रय प्रदान करते हैं। दक्षिण एशिया इसके वैश्विक कोर आवास क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, विशेषकर निम्नभूमि नदी घाटियों में।

जलवायु परिवर्तन, नदी तंत्र में बदलाव और आर्द्रभूमि ह्रास जैसी चुनौतियां इस प्रजाति के लिए खतरा बन रही हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • फिशिंग कैट आईयूसीएन रेड लिस्ट में ‘वulnerable’ श्रेणी में सूचीबद्ध है।
  • इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची–I के तहत संरक्षण प्राप्त है।
  • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम के ब्रह्मपुत्र बाढ़ मैदान में स्थित है।
  • फिशिंग कैट जलीय शिकार में विशेषज्ञ बिल्ली प्रजाति है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आर्द्रभूमि आधारित मांसाहारी प्रजातियों की निगरानी जलवायु परिवर्तन के दौर में अत्यंत महत्वपूर्ण है। दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में इसके लुप्त होने की खबरों के बीच, ब्रह्मपुत्र बाढ़ मैदान में काजीरंगा की भूमिका एक सुरक्षित शरणस्थली के रूप में उभरती है। यह भारत की जिम्मेदारी को और बढ़ाती है कि वह इस महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि प्रजाति के संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाए।

Originally written on February 27, 2026 and last modified on February 27, 2026.

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