काजीरंगा में पहली बार दिखी दुर्लभ ‘स्म्यू’ बत्तख, जलपक्षी गणना में बना आकर्षण
असम स्थित काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में पहली बार दुर्लभ ‘स्म्यू’ (Smew) नामक सफेद डाइविंग बत्तख का रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। यह महत्वपूर्ण अवलोकन काजीरंगा टाइगर रिजर्व के लाओखोवा बफर क्षेत्र के रोमारी-डोंडुवा बीलों में 7वीं जलपक्षी गणना के दौरान सामने आया। यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में प्रसिद्ध काजीरंगा के लिए यह एक महत्वपूर्ण पक्षीवैज्ञानिक उपलब्धि मानी जा रही है। इस वर्ष की गणना में 1.05 लाख से अधिक जलपक्षियों का दस्तावेजीकरण किया गया, जिसमें स्म्यू ‘स्टार प्रजाति’ बनकर उभरी।
स्म्यू: एक दुर्लभ प्रवासी बत्तख
स्म्यू (वैज्ञानिक नाम: Mergellus albellus) यूरेशियाई टैगा क्षेत्र से भारत आने वाला शीतकालीन प्रवासी पक्षी है। नर स्म्यू का शरीर मुख्यतः सफेद होता है, जिस पर काले रंग का विशिष्ट मुखौटा-सा निशान दिखाई देता है, जबकि मादा का रंग भूरा और धब्बेदार होता है।
भारत में इसकी उपस्थिति अत्यंत सीमित और विरल मानी जाती है। आमतौर पर यह उत्तरी और मध्य भारत के कुछ चुनिंदा आर्द्रभूमि क्षेत्रों में ही देखी जाती है। इससे पहले उत्तर प्रदेश के हैदरपुर तथा कॉर्बेट क्षेत्र में इसके अवलोकन दर्ज किए गए थे। यह प्रजाति मछलियों से भरपूर, सुरक्षित और शांत जलाशयों को पसंद करती है तथा प्रायः अकेले या छोटे समूहों में दिखाई देती है। वैश्विक स्तर पर इसकी परिपक्व आबादी लगभग 1.3 लाख आंकी गई है, किंतु आवास ह्रास और घोंसले के स्थलों की कमी के कारण संख्या में गिरावट देखी जा रही है।
7वीं जलपक्षी गणना की प्रमुख विशेषताएँ
काजीरंगा में 4 से 11 जनवरी के बीच आयोजित 7वीं जलपक्षी गणना मानकीकृत प्रोटोकॉल के तहत संपन्न हुई। इसमें 120 से अधिक गणनाकर्ता और 50 स्वयंसेवकों ने भाग लिया। सर्वेक्षण को काजीरंगा पार्क प्राधिकरण ने असम बर्ड मॉनिटरिंग नेटवर्क के सहयोग से संकलित किया।
अधिकारियों के अनुसार, बड़े और स्थायी आर्द्रभूमि क्षेत्रों में पक्षियों की संख्या अधिक दर्ज की गई, जबकि मौसमी बीलों ने प्रजातीय विविधता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह अध्ययन आर्द्रभूमि की सेहत, पक्षियों के आवास उपयोग और संरक्षण योजना के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
पारिस्थितिक महत्व और प्रवासी मार्ग
काजीरंगा की आर्द्रभूमियाँ ‘सेंट्रल एशियन फ्लाईवे’ का हिस्सा हैं, जो साइबेरिया और मध्य एशिया को भारतीय उपमहाद्वीप से जोड़ने वाला प्रमुख प्रवासी मार्ग है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, लाओखोवा और बुरहाचापोरी वन्यजीव अभयारण्य मिलकर महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (आईबीए) का निर्माण करते हैं।
स्म्यू की उपस्थिति यह संकेत देती है कि काजीरंगा की आर्द्रभूमियाँ अभी भी पारिस्थितिक रूप से स्वस्थ हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह जलवायु परिवर्तन के कारण प्रवासी प्रजातियों के वितरण में हो रहे बदलाव का भी संकेत हो सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान असम में स्थित यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है।
- सेंट्रल एशियन फ्लाईवे साइबेरिया से दक्षिण एशिया तक फैला प्रमुख प्रवासी मार्ग है।
- स्म्यू (Mergellus albellus) भारत में शीतकालीन प्रवासी पक्षी है।
- महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र (आईबीए) पक्षी संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील स्थल होते हैं।
काजीरंगा में 500 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैं और इसका संरक्षण इतिहास एक सदी से अधिक पुराना है। विशेषज्ञों ने नदी-बीेल पारिस्थितिकी तंत्र के समग्र संरक्षण पर बल दिया है, ताकि प्रवासी और स्थानीय दोनों प्रकार की प्रजातियों को जलवायु परिवर्तन, जल प्रवाह में बदलाव और भूमि उपयोग के दबावों से सुरक्षित रखा जा सके। स्म्यू की यह दुर्लभ उपस्थिति संरक्षण प्रयासों को और मजबूत करने का संदेश देती है।