कांगो बेसिन की झीलों से निकल रहा हजारों वर्ष पुराना कार्बन, जलवायु पर बढ़ी चिंता
अफ्रीका के डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो स्थित दो प्रमुख झीलों से हजारों वर्षों से पीटलैंड में सुरक्षित कार्बन के उत्सर्जन का खुलासा हुआ है, जिससे वैश्विक जलवायु स्थिरता को लेकर नई चिंताएँ उत्पन्न हो गई हैं। हालिया वैज्ञानिक अध्ययन में पाया गया है कि कांगो बेसिन की लेक माई-नडोम्बे और लेक टुम्बा से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड का एक बड़ा हिस्सा अत्यंत प्राचीन स्रोतों से आ रहा है। यह खोज उष्णकटिबंधीय पीटलैंड को दीर्घकालिक कार्बन भंडार मानने की पारंपरिक धारणा को चुनौती देती है।
झीलों से प्राचीन कार्बन का उत्सर्जन
शोध में पाया गया कि इन दोनों झीलों से उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा ऐसे पीट जमाव से आता है जो 3,000 वर्ष से भी अधिक पुराना है। अब तक यह माना जाता था कि जलमग्न पीट मिट्टी में कार्बन सुरक्षित रूप से बंद रहता है। वैज्ञानिकों ने इस खोज को आश्चर्यजनक बताया है, क्योंकि यह संकेत देता है कि कार्बन भंडार धीरे-धीरे झीलों के माध्यम से वायुमंडल में “लीक” हो सकता है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि पीटलैंड से कार्बन किस सटीक प्रक्रिया के माध्यम से झीलों तक पहुंच रहा है। इस रहस्य को समझने के लिए आगे और अनुसंधान की आवश्यकता बताई गई है।
उष्णकटिबंधीय पीटलैंड की भूमिका
पीटलैंड मृत वनस्पति के जलमग्न परिस्थितियों में आंशिक विघटन से बनते हैं। पानी से संतृप्त वातावरण में ऑक्सीजन की कमी के कारण अपघटन की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जिससे कार्बन हजारों वर्षों तक सुरक्षित रहता है। यही कारण है कि उष्णकटिबंधीय पीटलैंड को महत्वपूर्ण ‘कार्बन सिंक’ माना जाता है।
कांगो बेसिन के दलदली वन और पीटलैंड पृथ्वी की कुल भूमि का केवल लगभग 0.3 प्रतिशत हिस्सा घेरते हैं, फिर भी वे विश्व के उष्णकटिबंधीय पीटलैंड में संग्रहित कुल कार्बन का लगभग एक-तिहाई भाग संचित रखते हैं। यह क्षेत्र वैश्विक जलवायु संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण कार्बन भंडार है।
जलवायु परिवर्तन और भूमि उपयोग का खतरा
वैज्ञानिकों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और वनों की कटाई इस समस्या को और गंभीर बना सकते हैं। जब पीटलैंड सूखने लगते हैं—चाहे वह सूखे के कारण हो या कृषि विस्तार जैसे भूमि उपयोग परिवर्तन के कारण—तो सूक्ष्मजीव सक्रिय हो जाते हैं और संग्रहित कार्बन को वायुमंडल में छोड़ने लगते हैं।
यदि कांगो बेसिन में बड़े पैमाने पर वनों को कृषि भूमि में परिवर्तित किया जाता है, तो इससे सूखे की स्थिति बढ़ सकती है और पीट के सूखने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। परिणामस्वरूप, हजारों वर्षों से सुरक्षित कार्बन तेजी से उत्सर्जित होकर वैश्विक तापमान वृद्धि को बढ़ावा दे सकता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पीट आंशिक रूप से विघटित पौधों के अवशेषों से जलमग्न परिस्थितियों में बनता है।
- उष्णकटिबंधीय पीटलैंड वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण कार्बन सिंक हैं।
- कांगो बेसिन विश्व का दूसरा सबसे बड़ा वर्षावन क्षेत्र है, अमेज़न के बाद।
- कार्बन डाइऑक्साइड एक प्रमुख ग्रीनहाउस गैस है, जो वैश्विक ऊष्मीकरण में योगदान देती है।
कांगो बेसिन अभी भी विश्व के कम अध्ययन किए गए प्रमुख वन पारिस्थितिक तंत्रों में से एक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र की निरंतर निगरानी और व्यापक अनुसंधान अत्यंत आवश्यक है, ताकि यह समझा जा सके कि जलवायु परिवर्तन और मानवीय गतिविधियाँ इसके विशाल कार्बन भंडार को किस हद तक अस्थिर कर सकती हैं। यदि समय रहते उचित संरक्षण उपाय नहीं अपनाए गए, तो इसका प्रभाव केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक जलवायु संतुलन पर भी पड़ सकता है।