कश्मीर से कन्याकुमारी तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी ध्वज मार्च

कश्मीर से कन्याकुमारी तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का शताब्दी ध्वज मार्च

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी शताब्दी वर्ष की शुरुआत के अवसर पर 6 फरवरी से कश्मीर से कन्याकुमारी तक राष्ट्रव्यापी ध्वज मार्च की शुरुआत की है। यह अभियान संगठन के विचारों और कार्यों को लेकर जनसंपर्क बढ़ाने, संवाद स्थापित करने और जनता के बीच मौजूद भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से किया गया है।

ध्वज मार्च का उद्देश्य और प्रतीकात्मकता

RSS के अनुसार, यह ध्वज यात्रा संगठन के बारे में व्याप्त भ्रांतियों को मिटाने और जनता को उसके सामाजिक कार्यों से सीधे अवगत कराने की एक पहल है। देश के उत्तर से दक्षिण तक फैली यह यात्रा भारत की भौगोलिक एकता, सांस्कृतिक निरंतरता और राष्ट्रीय एकात्मता को दर्शाती है। स्वयंसेवक विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय समुदायों से संवाद स्थापित कर संघ के कार्यों को समझाने और राष्ट्र निर्माण में उसकी भूमिका को रेखांकित करने का प्रयास कर रहे हैं।

कश्मीर से कन्याकुमारी तक की यात्रा न केवल भौगोलिक विस्तार का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय सभ्यता की एकसूत्रता का भी परिचायक है।

RSS की शताब्दी वर्ष की उपलब्धि

1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित RSS इस वर्ष अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे कर रहा है। बीते वर्षों में संघ ने देशभर में शाखाओं, सेवा कार्यों और सहायक संगठनों के माध्यम से अपना कार्यक्षेत्र व्यापक किया है। शताब्दी समारोह के अंतर्गत देशभर में विविध कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, जिनमें संगठन के इतिहास, विचारधारा और सामाजिक भूमिका को रेखांकित किया जा रहा है।

फिल्म ‘शतक’ और स्मृति आयोजन

शताब्दी वर्ष के हिस्से के रूप में फिल्म निर्देशक वीर कपूर द्वारा निर्मित फिल्म ‘शतक’ 19 फरवरी को रिलीज़ होने जा रही है। यह फिल्म 1947 के कश्मीर संघर्ष के दौरान शहीद हुए संघ कार्यकर्ताओं, स्थानीय कश्मीरी नागरिकों और भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि देती है। फिल्म में उन अनसुनी कहानियों को उजागर किया गया है जो बलिदान, देशभक्ति और राष्ट्रीय प्रतिबद्धता की भावना को दर्शाती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • RSS की स्थापना 1925 में नागपुर में डॉ. के. बी. हेडगेवार द्वारा की गई थी।
  • कश्मीर 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद से एक प्रमुख संघर्ष क्षेत्र रहा है।
  • कन्याकुमारी भारत की मुख्य भूमि का सबसे दक्षिणी छोर है।
  • किसी भी प्रमुख संगठन का शताब्दी वर्ष सामान्यतः राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक जनसंपर्क और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से मनाया जाता है।

राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ

RSS के इस ध्वज मार्च को सामाजिक और राजनीतिक हलकों में विशेष ध्यान मिल रहा है। समर्थक इसे संगठन की पारदर्शिता और जनसंपर्क की पहल के रूप में देख रहे हैं, जबकि आलोचक इसकी वैचारिक प्रवृत्तियों पर निगरानी बनाए हुए हैं। इसके बावजूद, यह यात्रा और ‘शतक’ जैसी सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ यह संकेत देती हैं कि RSS अपने ऐतिहासिक दृष्टिकोण को जनता के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए एक समन्वित प्रयास कर रहा है।

यह ध्वज यात्रा न केवल संगठन की विरासत को रेखांकित करती है, बल्कि समकालीन भारत में विचारधारात्मक संवाद की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी हो सकती है।

Originally written on February 9, 2026 and last modified on February 9, 2026.

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