कर्नाटक सरकार बनाएगी रेगुलेटरी सैंडबॉक्स ढांचा, उभरती तकनीकों के जिम्मेदार विकास को मिलेगा बढ़ावा
कर्नाटक सरकार ने कर्नाटक इनोवेशन एक्ट के तहत एक रेगुलेटरी सैंडबॉक्स फ्रेमवर्क स्थापित करने की योजना की घोषणा की है। यह पहल भारत में तेजी से हो रहे डिजिटल विस्तार, खासकर ग्रामीण इंटरनेट अपनाने और AI-सक्षम सेवाओं की बढ़ती मांग के संदर्भ में की गई है। इसका उद्देश्य उभरती तकनीकों के उत्तरदायी, सुरक्षित और भरोसेमंद विकास को प्रोत्साहित करना है।
रेगुलेटरी सैंडबॉक्स क्या है?
रेगुलेटरी सैंडबॉक्स एक ऐसा ढांचा होता है जिसमें स्टार्टअप्स, नवाचारकर्ता और अनुसंधान संस्थान नई तकनीकों का परीक्षण नियंत्रित वातावरण में कर सकते हैं।
इसका मकसद है कि इनोवेशन को प्रोत्साहन दिया जाए, लेकिन साथ ही सुरक्षा, जवाबदेही और जनविश्वास को भी बनाए रखा जाए।
यह प्रणाली परीक्षण की अनुमति देती है, जब तक कि इन तकनीकों के लिए स्थायी नीतिगत ढांचे तैयार न हो जाएं। अधिकारी मानते हैं कि ऐसी पहलें जरूरी हैं ताकि कानून और प्रौद्योगिकी एक समान गति से विकसित हों और नवाचार को बाधित न करें।
भारत के तकनीकी केंद्र के रूप में कर्नाटक की भूमिका
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि कर्नाटक देश में उन्नत तकनीकों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
- ऐक्सेलरेटर कार्यक्रम,
- डीप-टेक स्किलिंग,
- और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को और मजबूत किया जा रहा है।
इन पहलों का उद्देश्य है उद्योग, शैक्षणिक संस्थानों और सरकार के बीच सहयोग को बढ़ावा देना और AI अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करना।
कर्नाटक, भारत की राष्ट्रीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आर्किटेक्चर के विकास में भी अहम योगदान दे रहा है।
‘इंटरनेट इन इंडिया रिपोर्ट 2025’ की प्रमुख बातें
2025 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 958 मिलियन सक्रिय इंटरनेट उपयोगकर्ता दर्ज किए गए हैं, जो वार्षिक 8% वृद्धि को दर्शाता है।
इस वृद्धि में ग्रामीण भारत की भागीदारी सबसे अधिक रही, जो अब कुल उपयोगकर्ताओं का 57% है।
ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट उपयोग की वृद्धि शहरी क्षेत्रों की तुलना में चार गुना तेज़ रही है।
इस बढ़ते उपयोग का श्रेय शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म्स, ई-कॉमर्स विस्तार और AI-आधारित डिजिटल सेवाओं को जाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- रेगुलेटरी सैंडबॉक्स नवाचारों के परीक्षण के लिए नियमों में छूट वाला सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है।
- 2025 में भारत में 958 मिलियन इंटरनेट उपयोगकर्ता थे।
- ग्रामीण भारत अब 57% से अधिक इंटरनेट उपयोग के लिए जिम्मेदार है।
- AI-सक्षम सुविधाओं में वॉइस सर्च, इमेज सर्च, चैटबॉट्स, AI फिल्टर्स शामिल हैं।
AI उपयोग और डिजिटल समावेशन की प्रवृत्तियाँ
रिपोर्ट के अनुसार, 44% उपयोगकर्ताओं ने किसी न किसी AI-सक्षम सुविधा का उपयोग किया है।
- शॉर्ट वीडियो उपयोगकर्ता की संख्या 588 मिलियन तक पहुंच गई है।
- मल्टी-डिवाइस उपयोगकर्ता 193 मिलियन तक बढ़ गए हैं।
यह आंकड़े व्यापक डिजिटल समावेशन का संकेत हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे डिजिटल अवसंरचना बैंकिंग, भुगतान, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण बनती जा रही है, वैसे-वैसे AI के उपयोग में पारदर्शिता और सुशासन को भी बढ़ाना आवश्यक है।
यह रेगुलेटरी सैंडबॉक्स फ्रेमवर्क भारत को सुरक्षित तकनीकी नवाचार के पथ पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।