कर्नाटक में गिग वर्करों के लिए कल्याण बोर्ड का गठन: प्लेटफ़ॉर्म आधारित श्रमिकों को मिलेगा सामाजिक सुरक्षा का अधिकार
कर्नाटक सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए “कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स कल्याण विकास बोर्ड” का औपचारिक गठन कर दिया है। यह बोर्ड वर्ष 2025 में पारित “कर्नाटक प्लेटफॉर्म-आधारित गिग वर्कर्स (सामाजिक सुरक्षा और कल्याण विकास) अधिनियम” के तहत गठित किया गया है। यह पहल गिग और प्लेटफ़ॉर्म श्रमिकों के लिए एक संस्थागत सामाजिक सुरक्षा तंत्र सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
बोर्ड की संरचना और संगठन
जारी अधिसूचना के अनुसार, श्रम मंत्री इस बोर्ड के पदेन अध्यक्ष होंगे। इसके अतिरिक्त श्रम विभाग, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और वाणिज्यिक कर विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी पदेन सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सदस्य सचिव की भूमिका में रहेंगे और बोर्ड की दिन-प्रतिदिन की कार्यप्रणाली तथा कल्याण योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार होंगे।
गिग वर्करों और एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म का प्रतिनिधित्व
बोर्ड में गिग वर्कर्स के चार प्रतिनिधि नामित किए गए हैं, जो खाद्य वितरण और ऐप-आधारित परिवहन श्रमिकों के यूनियनों का प्रतिनिधित्व करते हैं। साथ ही चार प्रतिनिधि प्रमुख एग्रीगेटर कंपनियों से हैं, जिनमें पोर्टर, ज़ोमैटो, उबर और अमेज़न शामिल हैं। ट्रेड यूनियनों जैसे यूनाइटेड फूड डिलीवरी पार्टनर्स यूनियन, इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स, AITUC, और ओला-उबर ड्राइवर्स एंड ओनर्स एसोसिएशन को भी शामिल किया गया है। यह त्रिपक्षीय प्रतिनिधित्व बोर्ड के संतुलित और व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है।
पंजीकरण और कल्याण निधि तंत्र
बोर्ड के गठन के साथ ही सभी एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म और गिग वर्कर्स के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। एग्रीगेटरों को 45 दिनों के भीतर अपने पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्ण कर गिग वर्कर्स की जानकारी जमा करनी होगी। प्रत्येक पंजीकृत गिग वर्कर को एक विशिष्ट पहचान संख्या (UID) जारी की जाएगी, जिससे उन्हें सामाजिक सुरक्षा लाभों का वितरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
कल्याण निधि का वित्तपोषण तीन स्रोतों से किया जाएगा—एग्रीगेटरों से एकत्रित कल्याण शुल्क, गिग वर्कर्स के योगदान, और राज्य व केंद्र सरकार की ओर से प्राप्त अनुदान।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कर्नाटक गिग वर्करों के लिए वैधानिक कल्याण बोर्ड गठित करने वाला अग्रणी राज्य है।
- यह बोर्ड 2025 के राज्य अधिनियम के तहत गठित किया गया है।
- प्रत्येक गिग वर्कर को विशिष्ट पहचान संख्या दी जाएगी।
- कल्याण निधि में राज्य, केंद्र और श्रमिकों के योगदान शामिल होंगे।
कल्याण शुल्क और भविष्य की समीक्षा
राज्य सरकार ने एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म्स पर 1% से 1.5% तक का कल्याण शुल्क निर्धारित किया है, जो विभिन्न क्षेत्रों और व्यापार मॉडल के अनुसार परिवर्तनीय है। श्रम मंत्री संतोष लाड ने बताया कि शुल्क को प्रारंभ में कम रखा गया है ताकि प्लेटफॉर्म्स पर अचानक वित्तीय बोझ न पड़े, साथ ही निधि की सतत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि संग्रह अपर्याप्त पाया गया, तो शुल्क की दर अधिकतम 5% तक बढ़ाई जा सकती है।
यह कदम न केवल गिग इकोनॉमी में कार्यरत लाखों श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में एक नई शुरुआत है, बल्कि श्रमिक अधिकारों के क्षेत्र में एक नीतिगत बदलाव को भी दर्शाता है।