कर्नाटक में क्यासानुर वन रोग (KFD) से एक युवक की मृत्यु: ‘मंकी फीवर’ को लेकर सतर्कता फिर बढ़ी

कर्नाटक में क्यासानुर वन रोग (KFD) से एक युवक की मृत्यु: ‘मंकी फीवर’ को लेकर सतर्कता फिर बढ़ी

कर्नाटक के तीर्थहल्ली तालुक के एक 29 वर्षीय युवक की क्यासानुर वन रोग (Kyasanur Forest Disease – KFD) से मृत्यु ने एक बार फिर इस कम चर्चित लेकिन गंभीर जूनोटिक संक्रमण की ओर ध्यान खींचा है। यह घटना 28 जनवरी को उडुपी जिले के एक अस्पताल में हुई, जहां समय रहते निदान और रेफरल के बावजूद मरीज की हालत तेजी से बिगड़ गई।

यह मामला असामान्य क्यों है?

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, KFD की समय पर पहचान और इलाज से आमतौर पर मरीज पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। इस मामले में संक्रमण लक्षण प्रकट होने के एक दिन के भीतर ही पुष्टि हो गया था और मरीज कई दिनों तक स्थिर था। इसके बावजूद अचानक स्वास्थ्य गिरावट और मृत्यु इस बीमारी की अनिश्चित प्रकृति को दर्शाती है, जो समय पर इलाज के बावजूद गंभीर हो सकती है।

क्यासानुर वन रोग कैसे फैलता है?

हालांकि इसे ‘मंकी फीवर’ कहा जाता है, लेकिन यह सीधे बंदरों से इंसानों में नहीं फैलता। यह एक टिक जनित वायरल रक्तस्रावी बुखार (tick-borne viral haemorrhagic fever) है, जिसका प्रमुख वाहक है:

  • Haemaphysalis spinigera नामक जंगलों में पाया जाने वाला टिक।

संक्रमण के स्रोत:

  • संक्रमित टिक के काटने से
  • संक्रमित बंदर, गिलहरी या चूहों जैसे जानवरों के संपर्क में आने से
  • मानव-से-मानव संचरण नहीं होता

इस रोग का प्रकोप वन क्षेत्रों में अक्टूबर से आरंभ होकर जनवरी–अप्रैल के बीच चरम पर होता है।

लक्षण और स्वास्थ्य जोखिम

KFD के लक्षण आमतौर पर 3–8 दिनों में प्रकट होते हैं:

  • अचानक तेज बुखार, कंपकंपी, और तेज सिरदर्द
  • नाक, मसूड़ों या गले से रक्तस्राव
  • प्लेटलेट काउंट में कमी, निम्न रक्तचाप
  • गंभीर मामलों में: मतली, उल्टी, मांसपेशियों की जकड़न, मानसिक भ्रम, कंपकंपी, दृष्टि में गड़बड़ी

इस रोग की मृत्यु दर 2 से 10 प्रतिशत तक हो सकती है, जो समय पर निदान और उपचार पर निर्भर करती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य:

  • KFD एक टिक जनित वायरल रक्तस्रावी बुखार है।
  • इसका मुख्य वाहक है Haemaphysalis spinigera टिक।
  • मानव से मानव में नहीं फैलता
  • यह रोग कर्नाटक के वन क्षेत्रों में स्थानिक (endemic) है।

रोकथाम और उपचार

KFD के लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल उपचार नहीं है। इसका प्रबंधन सहायक चिकित्सा (supportive care) के माध्यम से किया जाता है:

  • तरल पदार्थ देना
  • रक्तस्राव नियंत्रण
  • प्लेटलेट सपोर्ट

रोकथाम के उपाय:

  • जंगलों में भ्रमण से बचना (विशेषकर प्रकोप के समय)
  • पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना
  • टिक रैपेलेंट का प्रयोग
  • मृत जानवरों को न छूना
  • जंगल से लौटने के बाद बुखार होने पर त्वरित चिकित्सा लेना

यह घटना दर्शाती है कि भले ही KFD दुर्लभ हो, लेकिन यह घातक हो सकता है। इससे निपटने के लिए समय पर पहचान, जागरूकता और सावधानी अत्यंत आवश्यक है।

Originally written on February 2, 2026 and last modified on February 2, 2026.

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