कर्नाटक पंचायत चुनावों में अब बैलेट पेपर से मतदान: सरकार का ईवीएम पर विश्वास कम
कर्नाटक कैबिनेट ने आगामी पंचायत चुनावों में बैलेट पेपर और बैलेट बॉक्स के माध्यम से मतदान कराने को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर जनता के बीच बढ़ती चिंताओं के मद्देनज़र लिया गया है, और यह राज्य में स्थानीय स्वशासन के चुनाव तंत्र में एक बड़ा बदलाव है।
कैबिनेट का निर्णय और विधायी संशोधन
राज्य मंत्री एच. के. पाटिल ने पुष्टि की कि मौजूदा कर्नाटक ग्राम स्वराज एवं पंचायत राज कानून में बैलेट पेपर से मतदान की स्पष्ट अनुमति नहीं है। इसलिए, सरकार ने कर्नाटक ग्राम स्वराज एवं पंचायत राज (संशोधन) विधेयक, 2026 लाने का निर्णय लिया है। इस विधेयक के पारित होते ही पंचायत चुनावों को पारंपरिक बैलेट पेपर प्रणाली से कराने की वैधानिक मंजूरी मिल जाएगी।
ईवीएम को लेकर सार्वजनिक अविश्वास
सरकार ने अपने फैसले के पीछे ईवीएम को लेकर जनता में घटते भरोसे को प्रमुख कारण बताया है। ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिकों द्वारा मशीनों की पारदर्शिता और सटीकता पर उठाए गए सवालों ने इस निर्णय को प्रभावित किया है। कांग्रेस-नीत राज्य सरकार का मानना है कि कागज़ी मतपत्रों की वापसी से ग्रामीण लोकतंत्र में जनता का भरोसा मज़बूत होगा और भागीदारी बढ़ेगी।
पूर्व नीति संकेत और चुनाव आयोग की भूमिका
सितंबर 2025 में सरकार ने पंचायत और नगरीय स्थानीय निकाय चुनावों में बैलेट पेपर के उपयोग की सिफारिश करने का निर्णय लिया था। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस सिफारिश को राज्य चुनाव आयोग को भेजा था। अब, कानून में संशोधन के बाद पंचायत चुनावों का संचालन उसी के अनुरूप किया जाएगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- पंचायत चुनावों का संचालन राज्य चुनाव आयोग के अधीन होता है, न कि निर्वाचन आयोग के।
- EVM का उपयोग भारत के संविधान में अनिवार्य नहीं है; यह एक प्रशासनिक सुविधा है।
- ग्राम स्वराज और पंचायत राज कानून राज्य सरकारों द्वारा बनाए जाते हैं।
- स्थानीय निकाय चुनाव लोकसभा और विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं और इनके नियम भी भिन्न होते हैं।
जमीनी लोकतंत्र पर प्रभाव
बैलेट पेपर प्रणाली अपनाने से चुनावी प्रबंधन, मतगणना समय और प्रशासनिक तैयारी में बदलाव आएगा। समर्थकों का मानना है कि यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शिता और विश्वास को जन्म देगी, जबकि आलोचक इसे धीमी और जटिल मानते हैं। फिर भी सरकार का जोर इस बात पर है कि जनता का लोकतंत्र में विश्वास सर्वोपरि है, विशेष रूप से पंचायत जैसे नींव स्तर के लोकतांत्रिक संस्थानों में।
यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना की दिशा में एक प्रयास है, जो जनता की भागीदारी और विश्वास को केंद्र में रखकर पंचायत राज व्यवस्था को और मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।