ओडिशा में हुआ 10वां फिल्म संरक्षण एवं पुनर्स्थापन कार्यशाला भारत 2025
ओडिशा ने भारत की सिनेमाई धरोहर को संरक्षित करने के उद्देश्य से आयोजित “फिल्म प्रिजर्वेशन एंड रेस्टोरेशन वर्कशॉप इंडिया” (Film Preservation and Restoration Workshop India) के 10वें संस्करण की मेजबानी की। इस आयोजन में देशभर के फिल्म विशेषज्ञों, अभिलेखागार कर्मियों, शोधकर्ताओं और कलाकारों ने भाग लिया, जिन्होंने भारतीय सिनेमा की विविध परंपरा को सुरक्षित रखने के महत्व पर चर्चा की।
ओडिशा में फिल्म विरासत का उत्सव
भुवनेश्वर में आयोजित इस कार्यशाला का उद्घाटन प्रसिद्ध अभिनेत्री वहीदा रहमान ने किया। उन्होंने भारतीय सिनेमा के दस्तावेज़ीकरण, संरक्षण और पुनर्स्थापन के निरंतर प्रयासों की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि फिल्म संरक्षण केवल तकनीकी कार्य नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जिम्मेदारी भी है, जिससे आने वाली पीढ़ियाँ भारतीय सिनेमा के इतिहास से परिचित हो सकें।
संरक्षण क्षेत्र के अग्रदूतों को सम्मान
कार्यक्रम के दौरान फिल्म विरासत संरक्षण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले कई विशेषज्ञों को सम्मानित किया गया। “आउटस्टैंडिंग अचीवमेंट अवॉर्ड” प्रसिद्ध क्यूरेटर और अभिलेखीय सिनेमा के प्रबल समर्थक रॉबिन बेकर (Robin Baker) को प्रदान किया गया।इसके अलावा, ऐसे प्रयासों को भी सराहा गया जिन्होंने क्षेत्रीय सिनेमा, विशेषकर ओडिया फिल्मों के इतिहास को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
ओडिया सिनेमा के दस्तावेज़ीकरण को सम्मान
“चैम्पियन ऑफ फिल्म हेरिटेज अवॉर्ड” ओडिया सिनेमा के इतिहास के व्यापक दस्तावेज़ीकरण और दुर्लभ कलात्मक सामग्री के संरक्षण के लिए सूर्य देव (Surya Deo) को दिया गया।संजय पटनायक (Sanjoy Patnaik) को ओडिया फिल्म जगत के अग्रदूतों पर किए गए उनके शोध कार्य के लिए सम्मानित किया गया।इसके साथ ही, रश्मिरंजन मोहापात्रा (Rashmiranjan Mohapatra) को पारंपरिक पटचित्र कला के माध्यम से क्लासिक ओडिया फिल्मों की रचनात्मक प्रस्तुति के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- 10वां “फिल्म प्रिजर्वेशन एंड रेस्टोरेशन वर्कशॉप इंडिया” ओडिशा में आयोजित हुआ।
- भुवनेश्वर में कार्यक्रम का उद्घाटन अभिनेत्री वहीदा रहमान ने किया।
- रॉबिन बेकर को “आउटस्टैंडिंग अचीवमेंट अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया।
- सूर्य देव और संजय पटनायक को ओडिया सिनेमा के संरक्षण और शोध के लिए सम्मान मिला।
भारत के संरक्षण आंदोलन को नई दिशा
इस कार्यशाला ने फिल्म संरक्षण को एक सहयोगात्मक और रचनात्मक आंदोलन के रूप में सुदृढ़ किया। प्रशिक्षण, संवाद और नई तकनीकों पर आधारित सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को फिल्म पुनर्स्थापन की आधुनिक विधियाँ सिखाई गईं।यह आयोजन न केवल भारतीय सिनेमा के संरक्षण को बढ़ावा देता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि हमारी फिल्मी विरासत को सुरक्षित रखना सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के समान है एक ऐसा प्रयास जो आने वाली पीढ़ियों तक भारत की रचनात्मक आत्मा को जीवित रखेगा।