ओडिशा में भूमि दस्तावेजों पर क्यूआर कोड लागू, पारदर्शिता और सुरक्षा को बढ़ावा
ओडिशा सरकार ने भूमि स्वामित्व दस्तावेजों पर क्यूआर कोड लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे संपत्ति विवरण का त्वरित डिजिटल सत्यापन संभव हो सकेगा। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने घोषणा की कि प्रत्येक भूमि पट्टा या रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (आरओआर) पर जल्द ही क्यूआर कोड अंकित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, धोखाधड़ी पर रोक लगाना और राज्य में संपत्ति लेन-देन की प्रक्रिया को सरल बनाना है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद भूमि दस्तावेज पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन करते ही संबंधित संपत्ति का पूरा विवरण उपलब्ध होगा। इसमें भूमि का स्थान, प्लॉट का नक्शा, सीमाएं, क्षेत्रफल और अब तक का पूरा खरीद-बिक्री इतिहास शामिल रहेगा।
वर्तमान में खरीदारों को तहसील कार्यालय से एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (ईसी) प्राप्त करना पड़ता है, जो केवल पिछले 30 वर्षों के पंजीकृत लेन-देन की जानकारी देता है। क्यूआर आधारित प्रणाली 30 वर्षों से अधिक का ऐतिहासिक डेटा भी उपलब्ध कराएगी, जिससे स्वामित्व की पुष्टि अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी और फर्जी बिक्री की आशंका कम होगी।
अधिकारियों के अनुसार नए आरओआर पूरी तरह डिजिटल और छेड़छाड़-रोधी होंगे। यदि किसी भी भूमि रिकॉर्ड में अनधिकृत परिवर्तन किया जाता है, तो संबंधित राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार को स्वतः सूचना प्राप्त होगी।
अद्यतन आरओआर में भूमि की श्रेणी, उपयोग, सिंचाई की स्थिति, आसपास के भूखंडों की जानकारी और पार्सल मैप के साथ उसकी सीमाएं स्पष्ट रूप से दर्ज होंगी। इससे भूमि विवादों में कमी आने और प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ने की उम्मीद है।
यह पहल केंद्र सरकार की डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) के अंतर्गत की जा रही है, जिसे वर्ष 2016 में शुरू किया गया था। ओडिशा ने अपने भूमि अभिलेखों का बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण कर लिया है और क्यूआर कोड युक्त पट्टे इस सुधार का अगला चरण हैं।
राज्य में एक व्यापक भूमि सर्वेक्षण भी प्रस्तावित है, जिसके तहत सरकारी और निजी भूमि होल्डिंग्स का आकलन किया जाएगा। उच्च-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी, राष्ट्रीय सर्वेक्षण एजेंसियों के नक्शों और कैडस्ट्रल राजस्व डेटा को एकीकृत जीआईएस प्लेटफॉर्म पर जोड़ा जाएगा। प्रत्येक भूखंड को एक विशिष्ट प्लॉट संख्या के साथ बंद बहुभुज के रूप में डिजिटल रूप से मैप किया जाएगा, जो आरओआर डेटाबेस से लिंक रहेगा।
- डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम (डीआईएलआरएमपी) की शुरुआत वर्ष 2016 में हुई थी।
- रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (आरओआर) में भूमि स्वामित्व और उपयोग से संबंधित विवरण दर्ज होता है।
- एनकम्ब्रेंस सर्टिफिकेट (ईसी) में संपत्ति पर दर्ज बिक्री, बंधक या अन्य लेन-देन की जानकारी मिलती है।
- जीआईएस प्लेटफॉर्म स्थानिक (स्पैटियल) और पाठ्य (टेक्स्टुअल) भूमि डेटा को एकीकृत करता है।
क्यूआर कोड आधारित भूमि दस्तावेज व्यवस्था ओडिशा में भूमि शासन को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल संपत्ति लेन-देन में विश्वास बढ़ेगा, बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनेंगी।