ओडिशा में पूर्व राज्यपाल बिश्वभूषण हरिचंदन की दो पुस्तकों का विमोचन

ओडिशा में पूर्व राज्यपाल बिश्वभूषण हरिचंदन की दो पुस्तकों का विमोचन

ओडिशा के मुख्यमंत्री Mohan Charan Majhi ने भुवनेश्वर में आयोजित एक समारोह में वरिष्ठ राजनेता एवं पूर्व राज्यपाल Biswabhusan Harichandan द्वारा लिखित दो नई पुस्तकों का विमोचन किया। यह कार्यक्रम ओडिशा की राजनीतिक और सांस्कृतिक विरासत के सम्मान में आयोजित किया गया, जिसमें अनेक गणमान्य व्यक्तियों, विद्वानों और राजनीतिक नेताओं ने भाग लिया।

एक वरिष्ठ राजनेता को श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री ने इस अवसर को राज्य के लिए गर्व का क्षण बताया और कहा कि लेखक का जीवन और उनके आदर्श स्वयं में प्रेरणा का स्रोत हैं। बिश्वभूषण हरिचंदन ओडिशा में भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक प्रदेश अध्यक्ष रहे और चार बार इस पद पर रहे।

वे 1977 से 2009 के बीच पांच बार विधायक निर्वाचित हुए और चार बार कैबिनेट मंत्री रहे। राजनीति में आने से पहले वे 1972 से ओडिशा उच्च न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में कार्यरत थे। 1975–77 के आपातकाल के दौरान उन्होंने लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का नेतृत्व किया और कारावास भी झेला, जो उनके संवैधानिक मूल्यों के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

बक्शी जगबंधु और पाइका विद्रोह पर फोकस

विमोचित पुस्तकों में से एक, “बक्शी जगबंधु: द ग्रेट कमांडर”, 1817 के पाइका विद्रोह के नेता Bakshi Jagabandhu की विरासत पर केंद्रित है। यह विद्रोह खोरधा में हुआ था और इसे 1857 के सिपाही विद्रोह से चार दशक पहले का स्वतंत्रता संग्राम माना जाता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पुस्तक विद्रोह के कम ज्ञात पहलुओं को उजागर करती है और उसके ऐतिहासिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास करती है।

इतिहास, लोकतंत्र और पहचान पर निबंध

दूसरी पुस्तक “ए माटी कथा कहे” ओड़िया भाषा में लिखी गई है, जिसमें 30 निबंध शामिल हैं। इन निबंधों में Subhas Chandra Bose, Atal Bihari Vajpayee, लोकतंत्र, मीडिया, ओड़िया पहचान, विश्व शांति और भगवान जगन्नाथ के नबकलेवर उत्सव जैसे विषयों पर चर्चा की गई है।

नबकलेवर Nabakalebara भगवान जगन्नाथ से जुड़ा एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान है, जो निश्चित अंतराल पर पुरी में आयोजित होता है। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि इस पुस्तक का अंग्रेजी अनुवाद भी किया जाएगा, ताकि व्यापक पाठक वर्ग तक इसकी पहुंच हो सके।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • पाइका विद्रोह 1817 में खोरधा, ओडिशा में हुआ था।
  • भारत में आपातकाल 1975 से 1977 तक लागू रहा।
  • नबकलेवर पुरी में भगवान जगन्नाथ से जुड़ा एक आवधिक धार्मिक अनुष्ठान है।
  • संविधान के अनुच्छेद 155 के तहत राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

समग्र रूप से, यह समारोह बिश्वभूषण हरिचंदन के दीर्घ सार्वजनिक जीवन और साहित्यिक योगदान का सम्मान था। उनके राजनीतिक अनुभव और ऐतिहासिक लेखन ने ओडिशा की राजनीतिक चेतना और सांस्कृतिक स्मृति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Originally written on February 12, 2026 and last modified on February 12, 2026.

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