ओडिशा के रंगैलुंडा में राष्ट्रीय UAV परीक्षण और नवाचार कॉरिडोर की स्थापना
भारत के ड्रोन और एडवांस मोबिलिटी क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि के रूप में, ओडिशा सरकार ने रंगैलुंडा में राष्ट्रीय UAV (Unmanned Aerial Vehicle) परीक्षण और नवाचार कॉरिडोर स्थापित करने की घोषणा की है। यह पहल हैदराबाद में आयोजित विंग्स इंडिया 2026 कार्यक्रम के दौरान प्रस्तुत की गई, जो ओडिशा को अगली पीढ़ी की मानव रहित हवाई प्रणालियों के विकास में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करेगी।
रंगैलुंडा हवाई अड्डा: भारत का पहला लाइव ड्रोन परीक्षण केंद्र
रंगैलुंडा को इस कॉरिडोर के लिए चुना गया है, जो भारत का पहला ऐसा परिचालित वाणिज्यिक हवाई अड्डा होगा जिसे लाइव ड्रोन परीक्षण सुविधा के रूप में पुनर्परिभाषित किया जा रहा है। पारंपरिक ड्रोन परीक्षण क्षेत्र जहां सीमित और नियंत्रित प्रयोगशालाओं में संचालित होते हैं, वहीं यह नया कॉरिडोर वास्तविक, सक्रिय हवाई क्षेत्र में परीक्षण की सुविधा देगा। इससे अत्याधुनिक UAV तकनीकों का सजीव वातावरण में मूल्यांकन और विस्तार संभव होगा, जो नवाचार की गति को बढ़ाएगा।
B-MAAN योजना के अंतर्गत चरणबद्ध विकास
यह परियोजना केंद्र सरकार की B-MAAN योजना (Bharat – Mission for Advanced Air Navigation) के अनुरूप है और इसे चरणबद्ध रूप में लागू किया जाएगा। इसके अंतर्गत स्वार्म टेस्टिंग, AI-आधारित नेविगेशन, स्वायत्त हवाई क्षेत्र प्रबंधन तथा उच्च घनत्व UAV संचालन जैसी उन्नत क्षमताओं का परीक्षण किया जाएगा। यह कॉरिडोर एक राष्ट्रीय सत्यापन और प्रमाणन प्लेटफॉर्म के रूप में भी कार्य करेगा, जिससे डेवलपर्स बड़े पैमाने पर अपने सिस्टम का परीक्षण कर सकेंगे, वह भी नवीनतम नियमों के अनुरूप।
सरकार और उद्योग जगत की साझेदारी
बॉनवी एयरो के साथ हुए समझौता कार्यक्रम के दौरान वाणिज्य एवं परिवहन विभाग की प्रमुख सचिव उषा पाधी (आईएएस) ने बताया कि ओडिशा सरकार का लक्ष्य है भविष्य की मोबिलिटी के लिए आधारभूत संरचना तैयार करना। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल नीति को लागू करने की नहीं, बल्कि राष्ट्रीय नीति निर्माण में भागीदारी की दृष्टि से की गई है, जिससे देश के निम्न-ऊंचाई वाले हवाई क्षेत्र में उन्नत अर्थव्यवस्था का निर्माण संभव होगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- रंगैलुंडा भारत का पहला परिचालित हवाई अड्डा होगा जिसे लाइव UAV परीक्षण कॉरिडोर में बदला जा रहा है।
- यह परियोजना B-MAAN योजना के अंतर्गत कार्यान्वित की जा रही है।
- स्वार्म ड्रोन तकनीक में कई UAV एक साथ AI के माध्यम से समन्वित संचालन करते हैं।
- स्वायत्त हवाई क्षेत्र प्रबंधन भविष्य के उच्च घनत्व ड्रोन संचालन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
भारत की ड्रोन अर्थव्यवस्था को नई गति
राष्ट्रीय UAV परीक्षण और नवाचार कॉरिडोर की स्थापना से न केवल स्वदेशी ड्रोन नवाचार को गति मिलेगी, बल्कि भारत उन्नत विमानन, रक्षा अनुप्रयोगों, लॉजिस्टिक्स और शहरी हवाई मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति में आ सकेगा। इसके साथ ही ओडिशा को एक रणनीतिक विमानन और एयरोस्पेस केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम है।