ओडिशा के बौद्ध विरासत स्थलों की भारत‑भूटान सांस्कृतिक कूटनीति में भूमिका

ओडिशा के बौद्ध विरासत स्थलों की भारत‑भूटान सांस्कृतिक कूटनीति में भूमिका

हाल ही में भारत के भूटान में राजदूत ने ओडिशा की सांस्कृतिक यात्रा कर राज्य की प्राचीन बौद्ध विरासत का अवलोकन किया। इस यात्रा ने भारत और भूटान के साझा बौद्ध सांस्कृतिक मूल्यों को रेखांकित करते हुए, ओडिशा की ऐतिहासिक भूमिका को उजागर किया — जो प्राचीन भारत में बौद्ध शिक्षा और तीर्थ का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है।

प्रमुख बौद्ध स्थलों का भ्रमण

इस यात्रा के दौरान राजदूत ने ओडिशा के विभिन्न ऐतिहासिक बौद्ध स्थलों — रत्नगिरि, ललितगिरि और उदयगिरि — का भ्रमण किया।
इन स्थलों में:

  • प्राचीन स्तूप,
  • विहार (मठ),
  • और पुरातात्विक खुदाइयों से प्राप्त अवशेष
    मौजूद हैं जो दर्शाते हैं कि मौर्य काल से लेकर गुप्तोत्तर काल तक ओडिशा में बौद्ध धर्म का व्यापक विकास हुआ था।

इन स्थलों पर महायान और वज्रयान परंपराओं के प्रमाण भी पाए जाते हैं, जो उन्हें अंतरराष्ट्रीय बौद्ध अनुयायियों के लिए विशेष रुचिकर बनाते हैं।

इतिहास में ओडिशा का बौद्ध महत्व

प्राचीन काल में ओडिशा को कलिंग के नाम से जाना जाता था और कलिंग युद्ध के पश्चात् सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया था। यह परिवर्तन बौद्ध धर्म के वैश्विक प्रसार में एक निर्णायक मोड़ माना जाता है।

रत्नगिरि, ललितगिरि और उदयगिरि जैसे स्थल भारत के सबसे पुराने संगठित बौद्ध स्थलों में गिने जाते हैं, जो न केवल धार्मिक बल्कि शैक्षिक गतिविधियों का भी केंद्र रहे हैं। यहाँ से कई भिक्षु और विद्वान दक्षिण और दक्षिण‑पूर्व एशिया तक बौद्ध दर्शन लेकर गए।

सांस्कृतिक कूटनीति और भारत‑भूटान संबंध

इस यात्रा को भारत‑भूटान सांस्कृतिक कूटनीति का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
दोनों देशों के साझा बौद्ध मूल्यों के आधार पर:

  • सांस्कृतिक आदान‑प्रदान,
  • तीर्थयात्रा सहयोग,
  • और शैक्षणिक जुड़ाव
    को बढ़ावा देने की संभावनाएं प्रबल हैं।

सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy) भारत की “सॉफ्ट पावर” नीति का एक अहम हिस्सा है, जो अंतरराष्ट्रीय संबंधों को मजबूत करने के लिए सांस्कृतिक विरासत को माध्यम बनाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • कलिंग युद्ध (261 ई.पू.) के बाद सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपनाया और उसका प्रचार किया।
  • रत्नगिरि, ललितगिरि और उदयगिरि ओडिशा के तीन प्रमुख बौद्ध स्थल हैं।
  • ओडिशा में महायान और वज्रयान दोनों बौद्ध परंपराओं के प्रमाण मिलते हैं।
  • सांस्कृतिक कूटनीति भारत की विदेश नीति में एक सॉफ्ट पावर उपकरण है।

विरासत पर्यटन और शोध को बढ़ावा

इस यात्रा से ओडिशा में बौद्ध विरासत पर्यटन की संभावनाओं पर भी ध्यान आकर्षित हुआ है। अधिकारियों ने कहा कि:

  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाकर
  • इन स्थलों के संरक्षण,
  • शैक्षणिक शोध,
  • और सतत पर्यटन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

यह प्रयास ओडिशा को वैश्विक बौद्ध सर्किट में एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में सहायक होगा।

Originally written on January 9, 2026 and last modified on January 9, 2026.

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