ओडिशा के तट पर पहली बार मिला दुर्लभ समुद्री एम्फिपोड “स्टेनोथोए लोवरीआई”
ओडिशा के गंजाम जिले के अरज्यापल्ली तट पर समुद्री वैज्ञानिकों ने पहली बार भारतीय जलक्षेत्र में एक दुर्लभ झींगा जैसे समुद्री जीव “स्टेनोथोए लोवरीआई” की उपस्थिति दर्ज की है। यह खोज बरहामपुर विश्वविद्यालय के समुद्री विज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं द्वारा की गई। इससे पहले यह प्रजाति केवल मलेशिया में दर्ज की गई थी और अन्य क्षेत्रों में इसकी उपस्थिति के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध थी। इस खोज से भारतीय समुद्री जैव विविधता के अध्ययन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
बरहामपुर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की खोज
इस खोज का नेतृत्व बरहामपुर विश्वविद्यालय के समुद्री विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर शेषदेव पात्रो ने किया। यह शोध ओडिशा राज्य उच्च शिक्षा परिषद द्वारा वित्तपोषित मुख्यमंत्री रिसर्च इनोवेशन एक्स्ट्राम्यूरल प्रोग्राम के तहत किया गया। जनवरी 2025 में किए गए फील्ड सर्वे के दौरान शोधकर्ताओं ने अरज्यापल्ली के चट्टानी समुद्री तट से आठ नमूने एकत्र किए। बाद में किए गए विस्तृत वैज्ञानिक विश्लेषण में यह पुष्टि हुई कि ये नमूने स्टेनोथोए लोवरीआई प्रजाति के हैं, जो भारतीय जलक्षेत्र में इस प्रजाति की पहली दर्ज उपस्थिति है।
शोध प्रकाशन और प्रजाति की पहचान
इस महत्वपूर्ण खोज के परिणाम जर्नल ऑफ द मरीन बायोलॉजिकल एसोसिएशन ऑफ द यूनाइटेड किंगडम के नवीनतम अंक में प्रकाशित किए गए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इस प्रजाति की पहचान इसके अपेक्षाकृत बड़े पंजों और चट्टानी समुद्री वातावरण में रहने की प्रवृत्ति से की जा सकती है। यह एम्फिपोड लगभग 5.5 मिलीमीटर लंबा होता है और छोटे क्रस्टेशियनों के समूह से संबंधित है, जो समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में व्यापक रूप से पाए जाते हैं।
समुद्री एम्फिपोड का पारिस्थितिक महत्व
हालांकि इस नई प्रजाति की पारिस्थितिक भूमिका का अभी विस्तृत अध्ययन जारी है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि यह समुद्री खाद्य श्रृंखला में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। एम्फिपोड प्रायः सूक्ष्म जीवों और बड़े समुद्री जीवों के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। शोधकर्ताओं ने इस प्रजाति के व्यवहार, आवास और विकासवादी संबंधों को समझने के लिए आणविक और पारिस्थितिक अध्ययन भी शुरू कर दिए हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एम्फिपोड छोटे क्रस्टेशियन होते हैं जो झींगा से संबंधित होते हैं और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र में पाए जाते हैं।
- स्टेनोथोए लोवरीआई प्रजाति इससे पहले केवल मलेशिया में दर्ज की गई थी।
- यह प्रजाति ओडिशा के गंजाम जिले के अरज्यापल्ली के चट्टानी तटीय क्षेत्र में पाई गई है।
- ओडिशा की चिलिका झील एशिया की सबसे बड़ी खारे पानी की झीलों में से एक है और जैव विविधता से समृद्ध है।
ओडिशा में एम्फिपोड की अन्य खोजें
यह खोज उसी शोध दल द्वारा पहले की गई अन्य महत्वपूर्ण खोजों के बाद सामने आई है। जनवरी 2025 में शोधकर्ताओं ने चिलिका लैगून के राम्भा क्षेत्र से एक अन्य एम्फिपोड प्रजाति की पहचान की थी, जिसका नाम ग्रैंडिडिएरेला गीतांजलाए रखा गया था। इससे पहले नवंबर 2022 में चिलिका झील के बरकुल क्षेत्र से एक नई प्रजाति पैरहायले ओडियन भी दर्ज की गई थी। ये खोजें ओडिशा के समुद्री तटों और जलक्षेत्रों में मौजूद समृद्ध जैव विविधता को उजागर करती हैं।