ओडिशा की नयी शिक्षा और बाल कल्याण पहल: ‘आमे पढिबा आमा भाषारे’

ओडिशा की नयी शिक्षा और बाल कल्याण पहल: ‘आमे पढिबा आमा भाषारे’

ओडिशा सरकार ने महिलाओं और बच्चों के सार्थक विकास को केंद्र में रखते हुए पांच वर्षीय शिक्षा योजना ‘आमे पढिबा आमा भाषारे’, 100 दिन की बाल विवाह निवारण अभियान और किशोर गर्भधारण रोकने तथा किशोरी माताओं के समर्थन के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इन पहलों का उद्देश्य शिक्षा के माध्यम से सशक्तिकरण, समाज में समानता तथा सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना है।

शिक्षा योजना: जन्म से शिक्षा तक मातृभाषा का महत्व

उपमुख्यमंत्री प्रवाति परिदा ने कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा कि महिला सशक्तिकरण ही एक विकसित ओडिशा की नींव है और बच्चों की सुरक्षित तथा सम्मानजनक परवरिश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। ‘आमे पढिबा आमा भाषारे’ योजना के अंतर्गत 3 से 6 वर्ष के बच्चों को उनकी मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा दी जाएगी, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के अनुरूप है। मातृभाषा में शुरू हुई शिक्षा बच्चों की सीखने की क्षमता, संज्ञानात्मक विकास और सामाजिक पहचान को मजबूती प्रदान करती है। इससे बच्चों का शुरुआती अनुभव सकारात्मक बनता है तथा शैक्षिक जुड़ाव बढ़ता है।

शिक्षण सामग्री, ऑडियो-विजुअल सहायता और प्रशिक्षित आँगनवाड़ी कर्मचारियों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कक्षा में प्रभावी संलग्नता हो। ओडिशा सरकार आँगनवाड़ी केंद्रों को और अधिक आकर्षक, सुरक्षित तथा बाल-मित्रवत बनाने की भी योजना बना रही है, ताकि छोटे बच्चों के लिए सीखने का माहौल सजीव और उत्साहवर्धक बने।

आदिवासी भाषाओं में शिक्षा

पहले चरण में इस योजना को छह आदिवासी भाषाओं—मुंडा, कुई, सौर, कुवी, गोंडी और कोया—में लागू किया जाएगा और इसके क्षेत्रीय क्रियान्वयन के लिए छह जिलों को चिन्हित किया गया है: केओंझर, कंधमाल, गजपति, रायगडा, नबरंगपुर और मल्कांगिरी। इन जिलों में रहने वाले आदिवासी समुदायों के बच्चों के लिए मातृभाषा में शिक्षा उपलब्ध कराना एक बड़ी सामाजिक सुधार पहल के रूप में देखा जा रहा है, जो सांस्कृतिक संरक्षण और कौशल विकास को एक साथ जोड़ता है।

बाल विवाह तथा किशोर गर्भधारण रोकथाम अभियान

शिक्षा कार्यक्रम के साथ ओडिशा सरकार ने 100 दिन का बाल विवाह निवारण अभियान भी शुरू किया है। इसके साथ ही किशोर गर्भधारण को रोकने और किशोरी माताओं को समर्थन देने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट भी प्रारंभ किया गया है। अभियान का केंद्रीकरण लड़की बच्चों की शिक्षा, जागरूकता और सुरक्षा पर किया गया है। समुदाय की भागीदारी, युवाओं की नेतृत्व क्षमता, ASHA और आँगनवाड़ी कर्मचारियों की सक्रिय भूमिका तथा संस्थागत मंचों के सहयोग से इस अभियान को सफल बनाया जाएगा।

जागरूकता अभियान और सामुदायिक भागीदारी

उपमुख्यमंत्री परिदा ने जोर देकर कहा कि बाल विवाह रोकथाम अभियान की सफलता व्यापक जागरूकता गतिविधियों पर निर्भर करेगी। इसके अंतर्गत साइकिल रैली, युवा सम्मेलन, मानव शृंखला, तथा स्कूल और कॉलेज आधारित इयरली वार्निंग सिस्टम जैसे कार्यक्रम शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य है कि यह अभियान सामाजिक चेतना के स्तर को बढ़ाए तथा बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं के प्रति समुदाय को सजग करे। इसके साथ ही यह शिक्षा योजना सार्वजनिक भागीदारी और दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव के दृष्टिकोण से सुभद्रा योजना के समान लोकप्रियता हासिल करे।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ‘आमे पढिबा आमा भाषारे’ योजना प्रारंभिक शिक्षा को मातृभाषा में पढ़ाई पर केंद्रित करती है।
  • यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 से प्रभावित है।
  • ओडिशा के छह जिलों में छह आदिवासी भाषाओं में प्रारंभिक क्रियान्वयन किया जाएगा।
  • बाल विवाह रोकथाम अभियान में समुदाय और युवा भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है।

ओडिशा सरकार की ये पहलें न सिर्फ शिक्षा के मौलिक अधिकार को सुदृढ़ करेंगी, बल्कि बाल विवाह और किशोर गर्भधारण जैसी सामाजिक चुनौतियों का समाधान निकालने की दिशा में भी एक स्थायी बदलाव लाने में मददगार साबित होंगी। युवा शक्ति, सामुदायिक समर्थन और शिक्षा सशक्तिकरण के संयोजन से राज्य में समावेशी विकास को एक नई दिशा मिलेगी।

Originally written on January 17, 2026 and last modified on January 17, 2026.

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