ऑस्ट्रेलिया में खोजा गया अब तक का सबसे भारी विशालकाय स्टिक इंसेक्ट

ऑस्ट्रेलिया में खोजा गया अब तक का सबसे भारी विशालकाय स्टिक इंसेक्ट

ऑस्ट्रेलिया के उत्तर क्वींसलैंड के वर्षावनों में वैज्ञानिकों ने एक नई विशालकाय स्टिक इंसेक्ट प्रजाति की खोज की है, जिसका नाम “एक्रोफिला आल्टा” (Acrophylla alta) रखा गया है। यह खोज ऑस्ट्रेलिया की अद्वितीय जैव विविधता को और समृद्ध करती है तथा यह देश में अब तक दर्ज सबसे भारी स्टिक इंसेक्ट मानी जा रही है।

क्वींसलैंड के वर्षावन में हुई खोज

वैज्ञानिकों ने यह प्रजाति उत्तर क्वींसलैंड के पर्वतीय वर्षावनों में फील्ड अध्ययन के दौरान खोजी। यह कीट अपने हरे-भूरे रंग और लंबी पतली आकृति के कारण पेड़ों की शाखाओं में बखूबी छिप जाता है, जिससे यह लंबे समय तक अनदेखा रह गया। इसका निवास स्थल जंगल की ऊँचाई पर स्थित छत्रक (कैनोपी) क्षेत्र है, जहाँ पहुंचना शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत कठिन होता है।

आकार और विशिष्ट विशेषताएँ

“एक्रोफिला आल्टा” की लंबाई लगभग 40 सेंटीमीटर तक पहुँच सकती है, जो इसे ऑस्ट्रेलिया के सबसे बड़े कीटों में शामिल करती है। अन्य स्टिक इंसेक्ट प्रजातियों की तुलना में इसका शरीर अपेक्षाकृत भारी है। प्रारंभिक अध्ययन में पाया गया कि एक नमूना लगभग 44 ग्राम वज़न का था, जो इससे पहले दर्ज किसी भी स्टिक इंसेक्ट से अधिक है। इसका भारी शरीर और विशाल आकार इसे अन्य समान प्रजातियों से अलग पहचान देता है।

आवास और अनुकूलन

यह प्रजाति समुद्र तल से 500 से 1,200 मीटर ऊँचाई वाले ठंडे और नम वर्षावनों में पाई जाती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका बड़ा आकार बर्गमैन के नियम (Bergmann’s Rule) के अनुरूप है, जिसके अनुसार ठंडे जलवायु क्षेत्रों में रहने वाले जीव बड़े आकार के विकसित होते हैं ताकि वे अधिक ऊष्मा संचित कर सकें। इसका ऊँचाई वाला और कठिन-से-पहुँचने वाला आवास इस बात का कारण है कि यह प्रजाति अब तक खोज में नहीं आई थी।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • “एक्रोफिला आल्टा” उत्तर क्वींसलैंड के ऊँचाई वाले वर्षावनों में खोजी गई।
  • यह ऑस्ट्रेलिया की अब तक की सबसे भारी स्टिक इंसेक्ट प्रजाति मानी जा रही है।
  • इसकी लंबाई लगभग 40 सेंटीमीटर तक होती है।
  • इसका आकार ठंडे, ऊँचाई वाले वातावरण के अनुरूप अनुकूलन का परिणाम माना गया है।

“एक्रोफिला आल्टा” की खोज न केवल ऑस्ट्रेलिया की जैव विविधता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि देश के सुदूर वर्षावनों में अभी भी कई अज्ञात जीव छिपे हो सकते हैं। यह अध्ययन पर्यावरणीय अनुसंधान की आवश्यकता और पारिस्थितिक तंत्र की गहराई को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

Originally written on November 14, 2025 and last modified on November 14, 2025.

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