ऑस्ट्रेलिया में कोआला की आबादी में तेजी से बढ़ोतरी से बढ़ी आनुवंशिक विविधता
ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में कोआला की आबादी में तेजी से हुई वृद्धि ने वैज्ञानिकों को एक नई उम्मीद दी है। हाल ही में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य में कोआला की संख्या बढ़ने के साथ उनकी आनुवंशिक विविधता में भी वृद्धि देखी गई है। यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका “साइंस” में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन से संकेत मिलता है कि यदि किसी प्रजाति की संख्या तेजी से बढ़ती है तो वह गंभीर जनसंख्या गिरावट के बाद भी धीरे-धीरे अपनी आनुवंशिक क्षमता और अनुकूलन क्षमता को पुनः विकसित कर सकती है।
ऐतिहासिक गिरावट और संरक्षण प्रयास
बीसवीं शताब्दी की शुरुआत तक विक्टोरिया में कोआला की संख्या लगभग समाप्त हो गई थी। इसका मुख्य कारण फर के व्यापार के लिए बड़े पैमाने पर किया गया शिकार था। उस समय इनकी संख्या घटकर लगभग 500 रह गई थी। इस संकट से बचाने के लिए संरक्षणवादियों ने कोआला के छोटे समूहों को पास के द्वीपों पर स्थानांतरित कर दिया, जहाँ वे सुरक्षित रूप से प्रजनन कर सके। कई दशकों में इन द्वीपों पर उनकी संख्या काफी बढ़ गई और बाद में इन कोआला को फिर से मुख्य भूमि के जंगलों में बसाया गया ताकि उनकी आबादी को पुनर्जीवित किया जा सके।
आबादी में वृद्धि और आनुवंशिक परिवर्तन
वर्ष 2020 तक विक्टोरिया में कोआला की संख्या बढ़कर लगभग पाँच लाख तक पहुँच गई। हालांकि इन अधिकांश कोआला का वंश सीमित संख्या के पूर्वजों से जुड़ा हुआ है, जिससे आनुवंशिक विविधता में कमी यानी “जेनेटिक बॉटलनेक” की स्थिति बनी। वैज्ञानिकों ने पूर्वी ऑस्ट्रेलिया की 27 आबादियों से 418 कोआला के आनुवंशिक आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि हालांकि कुल आनुवंशिक विविधता अभी भी सीमित है, लेकिन तेजी से बढ़ती आबादी ने जीनों के पुनर्संयोजन और नए उत्परिवर्तन की संभावना को बढ़ा दिया है। इससे नई आनुवंशिक संरचनाएं विकसित हो रही हैं जो भविष्य में स्वस्थ पीढ़ियों के लिए सहायक हो सकती हैं।
अंतःप्रजनन में कमी और स्वास्थ्य सुधार
अंतःप्रजनन के कारण अक्सर जीवों में शारीरिक विकृतियाँ और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली जैसी समस्याएँ देखी जाती हैं। पहले किए गए अध्ययनों में कोआला में दांतों और प्रजनन से जुड़ी असामान्यताओं के उदाहरण सामने आए थे। नए शोध से संकेत मिला है कि जैसे-जैसे आबादी बढ़ी, वैसे-वैसे आनुवंशिक मिश्रण भी बढ़ा, जिससे इन नकारात्मक प्रभावों में कमी आने लगी। लाभकारी आनुवंशिक संयोजन धीरे-धीरे आबादी में फैलने लगे हैं, जिससे कोआला के स्वास्थ्य में सुधार देखा जा रहा है।
वन्यजीव संरक्षण के लिए महत्व
वैज्ञानिकों के अनुसार कोआला की यह पुनर्बहाली इस बात का उदाहरण है कि यदि किसी प्रजाति की आबादी तेजी से बढ़ाई जाए तो वह आनुवंशिक बॉटलनेक जैसी समस्याओं से उबर सकती है। शुरुआती चरण में भले ही आनुवंशिक विविधता कम रहे, लेकिन समय के साथ प्रजनन और प्राकृतिक उत्परिवर्तन के कारण नई विविधता विकसित हो सकती है। यह अध्ययन संरक्षण जीवविज्ञान के लिए महत्वपूर्ण है और यह संकेत देता है कि विलुप्ति के खतरे से जूझ रही प्रजातियों को बचाने के लिए उनकी आबादी को तेजी से बढ़ाना एक प्रभावी रणनीति हो सकती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- कोआला (Phascolarctos cinereus) ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला एक मार्सुपियल स्तनधारी है।
- आनुवंशिक बॉटलनेक तब होता है जब किसी प्रजाति की आबादी अचानक बहुत कम हो जाती है और आनुवंशिक विविधता घट जाती है।
- आनुवंशिक विविधता किसी प्रजाति के अनुकूलन और दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
- कोआला मुख्य रूप से नीलगिरी के जंगलों में रहते हैं और उनका प्रमुख भोजन नीलगिरी की पत्तियाँ होती हैं।
कोआला की आबादी में आई यह उल्लेखनीय वृद्धि न केवल ऑस्ट्रेलिया के लिए बल्कि वैश्विक वन्यजीव संरक्षण के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। यह दर्शाता है कि सही संरक्षण रणनीतियों और प्रभावी प्रबंधन से संकटग्रस्त प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया जा सकता है।