ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन 2026 का पहला चरण शुरू: व्याघ्र संरक्षण और पारिस्थितिकी आकलन की दिशा में अहम कदम
भारत में बाघों की संख्या और उनके आवास का वैज्ञानिक आकलन करने हेतु ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन 2026 (AITE‑26) का पहला चरण 6 जनवरी से प्रारंभ हो गया है। यह चरण तमिलनाडु के ईरोड वन प्रमंडल के तहत थंथाई पेरियार वन्यजीव अभयारण्य में संचालित किया जा रहा है, जो भारत के चार वर्षीय व्याघ्र गणना चक्र का हिस्सा है।
प्रशिक्षण और फील्ड तैनाती
वन्यजीव गणना प्रारंभ होने से पूर्व, वन विभाग के कर्मचारियों को संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किया गया।
इसके पश्चात चार वन रेंजों — अंथियूर, बर्गूर, चेंनामपट्टी और थत्ताकरै — में क्षेत्रीय कार्य प्रारंभ हुआ।
- 150 से अधिक कर्मचारी 52 वन बीटों में टीमों में विभाजित होकर नियुक्त किए गए हैं
- यह व्यवस्थित स्थानिक कवरेज सुनिश्चित करने के लिए किया गया है
लाइन ट्रांसेक्ट विधि और प्रजातियों का दायरा
गणना के पहले तीन दिनों में लाइन ट्रांसेक्ट विधि का उपयोग किया जा रहा है, जिसमें टीमों द्वारा निर्धारित मार्गों पर:
- पगचिन्ह (pugmarks)
- मल (droppings)
- और सीधे दर्शन (direct sightings)
दर्ज किए जाते हैं।
हालाँकि इस गणना का मुख्य उद्देश्य बाघों की उपस्थिति दर्ज करना है, लेकिन इसके साथ ही अन्य मांसाहारी जीवों (co-predators) जैसे तेंदुआ, भालू, हाथी, गौर आदि को भी प्रलेखित किया जा रहा है।
महत्त्वपूर्ण बात यह है कि केवल टाइगर रिजर्व ही नहीं, बल्कि वे वन प्रमंडल भी शामिल हैं जहाँ बाघ जैसे शिकारी जीव उपस्थित हैं, ताकि व्यापक पारिस्थितिकी आंकड़े एकत्र किए जा सकें।
शाकाहारी प्रजातियाँ, पक्षी और वनस्पति मूल्यांकन
अगले तीन दिनों में गणना का ध्यान बड़े शाकाहारी जीवों पर केंद्रित रहेगा, जिनमें हाथी, गौर और हिरण शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त:
- गिद्ध जैसे शवभक्षी पक्षी
- वृक्षों की प्रजातियाँ,
- घास, झाड़ियाँ, खरपतवार और वनभूमि आवरण का विवरण
भी एकत्र किया जाएगा।
इस समेकित दृष्टिकोण से शिकार आधार (prey base), आवास गुणवत्ता (habitat quality) और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य का आकलन संभव होगा — जो दीर्घकालिक बाघ संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ऑल इंडिया टाइगर एस्टिमेशन हर चार वर्ष में एक बार आयोजित की जाती है।
- लाइन ट्रांसेक्ट विधि वन्यजीव जनसंख्या नमूने के लिए व्यापक रूप से प्रयुक्त होती है।
- बाघ गणना में शिकार आधार और आवास गुणवत्ता का भी मूल्यांकन शामिल होता है।
- नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) भारत में बाघ संरक्षण की शीर्ष संस्था है।
आंकड़ा संकलन और राष्ट्रीय रिपोर्टिंग
ईरोड वन प्रमंडल में यह फील्ड स्तर सर्वेक्षण 12 जनवरी तक पूरा किया जाएगा।
- इसके बाद सभी एकत्र आँकड़े — बाघ, अन्य जीवों, पक्षियों और वनस्पतियों से संबंधित — को 31 जनवरी तक NTCA को सौंपा जाएगा।
- AITE‑26 की राष्ट्रीय रिपोर्ट 2027 में प्रकाशित की जाएगी, जो नीति-निर्धारण, आवास प्रबंधन, और राष्ट्रीय संरक्षण रणनीति को दिशा देगी।
भारत की यह बाघ गणना प्रणाली विश्व की सबसे विस्तृत और वैज्ञानिक रूप से समन्वित वन्यजीव गणनाओं में से एक है, जो प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण हेतु एक अनुकरणीय प्रयास है।