ऑपरेशन मिलाप के तहत दिल्ली पुलिस ने 1,303 गुमशुदा लोगों को खोज निकाला: पुलिस और समुदाय की साझा सफलता

ऑपरेशन मिलाप के तहत दिल्ली पुलिस ने 1,303 गुमशुदा लोगों को खोज निकाला: पुलिस और समुदाय की साझा सफलता

दिल्ली पुलिस की दक्षिण-पश्चिम जिला इकाई ने वर्ष 2025 के दौरान “ऑपरेशन मिलाप” अभियान के तहत 1,303 गुमशुदा व्यक्तियों को सफलतापूर्वक खोज निकाला है। इसमें 434 बच्चे और 869 वयस्क शामिल हैं। यह उपलब्धि पुलिस की सतत निगरानी, सामुदायिक सहयोग और आपसी समन्वय की दिशा में एक महत्वपूर्ण सफलता के रूप में देखी जा रही है। इस प्रयास ने जहां परिवारों को फिर से एकजुट किया, वहीं पुलिस पर जनता का विश्वास भी और मजबूत हुआ।

ऑपरेशन मिलाप: एक वर्ष की उपलब्धियाँ

ऑपरेशन मिलाप दिल्ली पुलिस द्वारा चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है, जिसका उद्देश्य गुमशुदा लोगों, विशेषकर बच्चों, का पता लगाना है। दिसंबर 2025 में ही 102 गुमशुदा व्यक्तियों को खोजा गया, जिनमें 35 बच्चे और 67 वयस्क शामिल हैं। अधिकारियों के अनुसार, लगातार फॉलो-अप, थानों के बीच समन्वय और स्थानीय स्तर पर खुफिया जानकारी जुटाने की रणनीति ने इस अभियान को गति दी।

स्थानीय जानकारी और सार्वजनिक स्थलों की भूमिका

दक्षिण-पश्चिम जिले के डीसीपी अमित गोयल ने बताया कि स्थानीय मुखबिरों और अस्पतालों तथा पुलिस स्टेशनों के रिकॉर्ड की नियमित जांच से महत्वपूर्ण सुराग मिले। पुलिस टीमों ने गुमशुदा व्यक्तियों की तस्वीरें बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, ऑटो स्टैंड और ई-रिक्शा प्वाइंट्स जैसे सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शित कीं, जिससे आम जनता से समय पर सूचनाएं प्राप्त हुईं और खोज प्रक्रिया को बल मिला।

दिसंबर माह में थाना-वार प्रदर्शन

दिसंबर 2025 में कपासहेड़ा, सागरपुर और पालम विलेज थानों ने सबसे अधिक गुमशुदा बच्चों को खोज निकाला। कपासहेड़ा थाने ने अकेले 12 बच्चियों को तलाशा, जबकि सागरपुर ने 8 और पालम विलेज ने 4 बच्चों को ढूंढ निकाला। वयस्क गुमशुदगी के मामलों में सागरपुर थाना सबसे आगे रहा, जिसने 16 वयस्कों को खोजा, इसके बाद कपासहेड़ा, पालम विलेज और वसंत कुंज साउथ थानों का स्थान रहा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • ऑपरेशन मिलाप दिल्ली पुलिस का एक अभियान है, जिसका उद्देश्य गुमशुदा लोगों, विशेषकर बच्चों को तलाशना है।
  • गुमशुदा व्यक्तियों की खोज में अस्पतालों और परिवहन केंद्रों के साथ समन्वय किया जाता है।
  • जिला पुलिस इकाइयाँ शहरी सुरक्षा व्यवस्था में केंद्रीय भूमिका निभाती हैं।
  • सामुदायिक सहभागिता से पुलिसिंग के परिणाम बेहतर होते हैं।

जिला-स्तरीय समन्वय और समावेशी प्रयास

केवल प्रमुख थानों ही नहीं, बल्कि वसंत कुंज नॉर्थ, किशनगढ़, आर. के. पुरम, सरोजिनी नगर, एस. जे. एन्क्लेव, साउथ कैंपस और दिल्ली कैंट जैसे थानों की टीमों ने भी गुमशुदा व्यक्तियों की खोज में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अधिकारियों का कहना है कि यह परिणाम विकेंद्रीकृत पुलिसिंग, डेटा साझाकरण और फील्ड लेवल पर निरंतर सक्रियता के महत्व को दर्शाते हैं, जो एक बड़े महानगरीय क्षेत्र में लापता व्यक्तियों से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

ऑपरेशन मिलाप केवल पुलिस की सफलता नहीं, बल्कि समाज और प्रशासन के बीच आपसी विश्वास और सहयोग का प्रतीक बन गया है, जो भविष्य में जनहित आधारित अभियानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन सकता है।

Originally written on January 2, 2026 and last modified on January 2, 2026.

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