ऑपरेशन त्राशी-I: बर्फीले जंगलों में आतंकियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की निर्णायक कार्रवाई
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षा बलों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों को और तेज़ कर दिया है, विशेषकर ऑपरेशन त्राशी-I के तहत जो अब निर्णायक चरण में पहुँच चुका है। लगातार हो रही भारी बर्फबारी और दुर्गम जंगलों के बीच, सेना, पैरा (स्पेशल फोर्सेज) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप की संयुक्त टीमें आतंकियों के खिलाफ मुस्तैदी से अभियान चला रही हैं।
चात्रू क्षेत्र में नई मुठभेड़
ताज़ा मुठभेड़ रविवार रात किश्तवाड़ के जनसीर-कंडीवार जंगल क्षेत्र में हुई, जहाँ आतंकियों ने सुरक्षा बलों की सर्च पार्टी पर फायरिंग शुरू कर दी। मुठभेड़ के बाद दो से तीन आतंकी अंधेरे का लाभ उठाकर फरार हो गए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क्षेत्र में अब भी सक्रिय आतंकियों की मौजूदगी बनी हुई है।
ऑपरेशन त्राशी-I की समयरेखा
- 18 जनवरी 2026 को इस ऑपरेशन की शुरुआत हुई, जब खुफिया इनपुट से आतंकियों की गतिविधि की जानकारी मिली।
- पहली मुठभेड़ मंड्राल-सिंगपोरा के पास सोनर गाँव में हुई, जिसमें 8 सुरक्षा कर्मी घायल हुए और एक की बाद में मृत्यु हो गई।
- 22 और 24 जनवरी को और दो मुठभेड़ें हुईं, जिनमें 24 जनवरी को जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े एक पाकिस्तानी आतंकी को ढेर किया गया।
ये घटनाएं क्षेत्र में लगातार आतंकी गतिविधियों की पुष्टि करती हैं।
कठिन भू-भाग और सघन तलाशी
क्षेत्र में दो फीट से अधिक बर्फबारी के बावजूद तलाशी अभियान जारी है। तलाशी का दायरा अब किश्तवाड़–सिंथन सड़क के किनारे तक बढ़ा दिया गया है। संभावित फरारी मार्गों को सील करने के लिए अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है।
सुरक्षा एजेंसियाँ अब ड्रोन, यूएवी (Unmanned Aerial Vehicles) और स्निफर डॉग स्क्वाड का भी इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि जंगलों में आतंकी हलचल को ट्रैक किया जा सके और घुसपैठ को रोका जा सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- किश्तवाड़ जिला, जम्मू-कश्मीर के चिनाब घाटी क्षेत्र में स्थित है।
- जैश-ए-मोहम्मद एक पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन है, जिसे भारत में प्रतिबंधित किया गया है।
- पैरा (स्पेशल फोर्सेज) भारतीय सेना की एलीट इकाइयाँ हैं, जो काउंटर-इंसर्जेंसी और स्पेशल मिशनों के लिए प्रशिक्षित होती हैं।
- ड्रोन और UAVs अब पर्वतीय इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।
कठुआ ऑपरेशनों से लिंक
सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन त्राशी-I की जड़ें 16 जनवरी को कठुआ जिले में चलाए गए ऑपरेशन से जुड़ी हैं, जहाँ तीन आतंकी ठिकानों को ध्वस्त किया गया था। वहाँ से भागे आतंकी किश्तवाड़ के जंगलों की ओर बढ़े, जिसकी पुष्टि खाद्य सामग्री, हथियार, और पाकिस्तानी मोबाइल नंबरों की बरामदगी से हुई है।
ऑपरेशन त्राशी-I दर्शाता है कि भारत की सुरक्षा एजेंसियाँ दुर्गम और चुनौतीपूर्ण भूभाग में भी आतंकवाद के खिलाफ सटीक और निरंतर कार्रवाई में सक्षम हैं। यह अभियान आने वाले समय में चिनाब घाटी क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति को निर्णायक रूप से प्रभावित कर सकता है।