ऑनलाइन अपराधों के खिलाफ राष्ट्रीय संवाद: महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर जोर
नई दिल्ली में आयोजित “महिलाओं और बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों” पर राष्ट्रीय संवाद का उद्घाटन केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने किया। इस कार्यक्रम का आयोजन गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र द्वारा किया गया। इस संवाद में सरकारी एजेंसियों, कानून प्रवर्तन संस्थाओं, डिजिटल प्लेटफॉर्म, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों को लक्षित करने वाले बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए प्रभावी रणनीतियों पर चर्चा करना और संस्थागत क्षमता को मजबूत बनाना था।
डिजिटल पारिस्थितिकी में बढ़ती चुनौतियाँ
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह सचिव ने कहा कि डिजिटल तकनीकों के तेजी से विस्तार के साथ साइबर अपराधों का जोखिम भी बढ़ गया है। विशेष रूप से महिलाएं और बच्चे ऑनलाइन अपराधों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संस्थागत तंत्र को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि ऐसे अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके। साथ ही उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे महिलाओं और बच्चों के खिलाफ ऑनलाइन अपराधों की जांच के लिए विशेष इकाइयों की स्थापना करें और मामलों के त्वरित निपटान को सुनिश्चित करें।
कानून प्रवर्तन एजेंसियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका
कानून प्रवर्तन एजेंसियों को निर्देश दिया गया कि वे महिलाओं और बच्चों से संबंधित ऑनलाइन अपराधों के मामलों को प्राथमिकता दें और उनकी त्वरित जांच सुनिश्चित करें। गृह सचिव ने सूचना प्रौद्योगिकी मध्यस्थों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 तथा उससे संबंधित नियमों का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया। अपराधियों की पहचान करने और अवैध ऑनलाइन सामग्री को शीघ्र हटाने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बीच सहयोग को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
मास्टर ट्रेनर्स इंडक्शन कार्यक्रम की शुरुआत
इस अवसर पर सरकार ने “मास्टर ट्रेनर्स इंडक्शन प्रोग्राम” की भी शुरुआत की, जिसका उद्देश्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों की क्षमता को मजबूत बनाना है। इस पहल के तहत विशेष रूप से प्रशिक्षित अधिकारियों का एक राष्ट्रीय समूह तैयार किया जाएगा, जिन्हें साइबर अपराधों की जांच और तकनीकी पहलुओं का विशेषज्ञ ज्ञान दिया जाएगा। बाद में यही अधिकारी राज्य और जिला स्तर पर अन्य कर्मियों को प्रशिक्षण देंगे, जिससे पूरे देश में साइबर अपराधों से निपटने की क्षमता में सुधार होगा।
समन्वित राष्ट्रीय रणनीति को मजबूत बनाना
इस राष्ट्रीय संवाद ने महिलाओं और बच्चों को लक्षित करने वाले साइबर अपराधों की नई प्रवृत्तियों पर विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच प्रदान किया। इसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी, इंटरनेट सेवा प्रदाता, सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधि, कानूनी विशेषज्ञ, शिक्षाविद और नागरिक समाज संगठन शामिल हुए। चर्चाओं में डिजिटल फॉरेंसिक क्षमताओं को मजबूत करने, शिकायत दर्ज करने की प्रक्रियाओं को सरल बनाने, पीड़ित सहायता प्रणाली को बेहतर बनाने और डिजिटल प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर विशेष ध्यान दिया गया।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 भारत में साइबर गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
- यह केंद्र साइबर अपराधों से निपटने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय और क्षमता निर्माण में सहायता करता है।
- महिलाओं और बच्चों के खिलाफ साइबर अपराधों में ऑनलाइन उत्पीड़न, शोषण और अवैध सामग्री का प्रसार शामिल होता है।