एलुमिनियम फॉस्फाइड (सेल्फोस) विषाक्तता के उपचार में पीजीआईएमईआर का वैश्विक शोध: अब मौत नहीं, जीवन मिलेगा
पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने एलुमिनियम फॉस्फाइड विषाक्तता — जिसे आमतौर पर सेल्फोस ज़हर के नाम से जाना जाता है — के इलाज में वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह खोज भारत के ग्रामीण और कृषि क्षेत्रों में जानलेवा ज़हर से होने वाली मौतों को रोकने की दिशा में क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती है।
पीजीआईएमईआर की ऐतिहासिक क्लिनिकल स्टडी
PGIMER के आंतरिक चिकित्सा विभाग द्वारा की गई इस क्लिनिकल स्टडी में पहली बार यह सिद्ध किया गया कि इंट्रावीनस लिपिड इमल्शन थेरेपी (IVLE), एलुमिनियम फॉस्फाइड विषाक्तता के इलाज में प्रभावी और जीवन रक्षक है। इस अध्ययन को “European Review of Medical and Pharmacological Sciences” जैसे प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया गया है।
इस शोध का नेतृत्व डॉ. संजय जैन (डीन – एकेडमिक्स एवं प्रमुख, आंतरिक चिकित्सा विभाग, PGIMER) ने किया।
बेहतर परिणाम: मृत्यु दर में भारी कमी
अध्ययन में यह पाया गया कि जिन रोगियों को लिपिड इमल्शन के साथ मानक चिकित्सा उपचार दिया गया, उनमें:
- मृत्यु दर में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई।
- गंभीर मेटाबोलिक एसिडोसिस का जल्दी सुधार हुआ।
- रक्तचाप और हृदय की स्थिरता बेहतर रही।
- और झटके एवं हृदय जटिलताओं वाले रोगियों में भी अच्छी रिकवरी देखी गई।
इस थेरेपी को जल्दी देना रोग के घातक प्रभाव को रोकने में निर्णायक सिद्ध हुआ।
ग्रामीण स्वास्थ्य के लिए सुलभ और सस्ता उपाय
इस उपचार की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह:
- सस्ता,
- आसानी से उपलब्ध,
- और पहले से ही अधिकांश सरकारी व निजी अस्पतालों में उपलब्ध है।
इसलिए यह उपचार भारत के जिला और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुँच सकता है, जहाँ सेल्फोस विषाक्तता के मामले सबसे अधिक सामने आते हैं और गहन चिकित्सा सुविधाएं सीमित होती हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एलुमिनियम फॉस्फाइड को सामान्यतः सेल्फोस के नाम से जाना जाता है।
- यह कृषि में अनाज संरक्षण हेतु व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
- इंट्रावीनस लिपिड इमल्शन थेरेपी अब इस विषाक्तता में मृत्यु दर को कम करने में प्रभावी सिद्ध हुई है।
- पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश इस विषाक्तता के सबसे अधिक प्रभावित राज्य हैं।
जन स्वास्थ्य में महत्व और शोध की व्यापक उपयोगिता
भारत के कई राज्यों में सेल्फोस विषाक्तता एक गंभीर जन स्वास्थ्य समस्या है। इसकी विषाक्तता इतनी अधिक है कि सामान्यतः मृत्यु अवश्यंभावी होती है। PGIMER के नेतृत्व में किया गया यह शोध दिखाता है कि स्थानीय जरूरतों पर आधारित, वैज्ञानिक अनुसंधान कैसे व्यावहारिक समाधान दे सकते हैं।
यह खोज भविष्य में हजारों लोगों की जान बचाने, विषाक्तता के इलाज में राष्ट्रीय स्तर पर बदलाव लाने, और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में एक मील का पत्थर सिद्ध हो सकती है।