एमपेपा प्रभाव का वैज्ञानिक समाधान: गर्म पानी के पहले जमने के पीछे का राज़

एमपेपा प्रभाव का वैज्ञानिक समाधान: गर्म पानी के पहले जमने के पीछे का राज़

विज्ञान जगत में लंबे समय से रहस्य बना हुआ “एमपेपा प्रभाव” अब वैज्ञानिकों द्वारा सुलझा लिया गया है। यह आश्चर्यजनक प्रभाव बताता है कि कुछ परिस्थितियों में गर्म पानी, ठंडे पानी की तुलना में तेजी से जम जाता है। भारत के वैज्ञानिकों ने सुपरकंप्यूटर आधारित सिमुलेशन की मदद से इस प्रक्रिया को आणविक स्तर पर समझा है, जिससे भौतिकी की नई परतें खुली हैं और भविष्य की ताप प्रबंधन तकनीकों में नई संभावनाएं उभरी हैं।

क्या है एमपेपा प्रभाव?

एमपेपा प्रभाव का उल्लेख सबसे पहले प्राचीन यूनानी दार्शनिक अरस्तू ने किया था। लेकिन आधुनिक विज्ञान में इसका नाम तंजानिया के छात्र एरास्टो एमपेपा के नाम पर पड़ा, जिन्होंने 1960 के दशक में यह प्रभाव स्कूल प्रयोगशाला में देखा। दशकों से वैज्ञानिक इसे समझने की कोशिश करते रहे हैं, लेकिन पानी की जटिल हाइड्रोजन बॉन्ड संरचना इसे समझने में बाधा बनती रही।

सुपरकंप्यूटर से मिली सफलता

जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR), बेंगलुरु के वैज्ञानिकों ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सहयोग से अत्याधुनिक सुपरकंप्यूटर तकनीक का प्रयोग किया। उन्होंने पानी के अणुओं की बर्फ बनने की प्रक्रिया को सटीक रूप से मॉडल किया और लैनार्ड-जोंस और पॉट्स मॉडल जैसे अन्य द्रव प्रणालियों से तुलना की।

इस अध्ययन से पता चला कि यह प्रभाव केवल पानी तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य पदार्थों के द्रव-से-ठोस रूपांतरण में भी देखने को मिल सकता है।

अणु स्तर पर तेजी से जमने की प्रक्रिया

शोधकर्ताओं ने पाया कि जब पानी ठंडा होता है तो वह सीधे बर्फ नहीं बनता, बल्कि पहले कई अस्थायी आणविक अवस्थाओं में फंस जाता है जिन्हें “काइनेटिक ट्रैप” कहा जाता है।

गर्म पानी, इन जालों में कम समय फंसा रहता है या कभी-कभी पूरी तरह बच जाता है, जिससे वह सीधे बर्फ बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ता है। यही कारण है कि कुछ स्थितियों में गर्म पानी, ठंडे पानी से पहले जम जाता है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • एमपेपा प्रभाव उस स्थिति को कहते हैं जब गर्म पानी, ठंडे पानी से पहले जमता है।
  • इसका नाम एरास्टो एमपेपा के नाम पर रखा गया है जिन्होंने इसे 20वीं सदी में फिर से खोजा।
  • यह प्रभाव nonequilibrium physics का उदाहरण है, जिसमें पदार्थ संतुलन की स्थिति में नहीं होते।
  • यह प्रभाव अब पानी के अलावा अन्य द्रव प्रणालियों में भी सिद्ध हो चुका है।

भविष्य के लिए क्या मायने?

इस शोध के परिणाम केवल सैद्धांतिक महत्व तक सीमित नहीं हैं। यह प्रभाव बताता है कि तापीय बदलाव के दौरान पदार्थों का व्यवहार किस प्रकार से बदल सकता है। यह जानकारी अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, ऊर्जा कुशल कूलिंग प्रणालियों और नई सामग्री डिजाइन में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।

एमपेपा प्रभाव की यह वैज्ञानिक व्याख्या न केवल एक लंबे समय से चले आ रहे रहस्य को सुलझाती है, बल्कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई राह भी खोलती है।

Originally written on January 8, 2026 and last modified on January 8, 2026.

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