एनसीबी ने ‘टीम कल्कि’ नामक पैन-इंडिया ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया

एनसीबी ने ‘टीम कल्कि’ नामक पैन-इंडिया ड्रग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने “टीम कल्कि” नाम से संचालित एक बड़े पैन-इंडिया ड्रग वितरण नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। यह नेटवर्क कथित रूप से डार्कनेट मार्केटप्लेस और एन्क्रिप्टेड संचार प्लेटफॉर्म का उपयोग करके देशभर में मादक और मनोदैहिक पदार्थों की आपूर्ति कर रहा था। पिछले तीन महीनों में प्राप्त खुफिया जानकारी के आधार पर नई दिल्ली में इस नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई की गई। यह ऑपरेशन भारत में ऑनलाइन माध्यम से संचालित ड्रग तस्करी के खिलाफ एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

डार्कनेट आधारित ड्रग वितरण नेटवर्क

एनसीबी के अनुसार यह नेटवर्क जनवरी 2025 से सक्रिय था और गुमनाम तरीके से ड्रग्स की बिक्री के लिए डार्कनेट प्लेटफॉर्म का उपयोग करता था। तस्कर ऑर्डर, भुगतान और डिलीवरी के समन्वय के लिए “सेशन” नामक एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लिकेशन का भी इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसे प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं की पहचान और स्थान को छिपाने की सुविधा देते हैं, जिससे संगठित अपराध समूहों के लिए इन्हें इस्तेमाल करना आसान हो जाता है। यही कारण है कि हाल के वर्षों में सीमा पार संचालित होने वाले ड्रग नेटवर्क इन तकनीकों का अधिक उपयोग करने लगे हैं।

पार्सलों से बरामद हुई मादक पदार्थों की खेप

जांच के दौरान एनसीबी अधिकारियों ने नेटवर्क से जुड़े कई पार्सलों को बीच में ही रोक लिया। अधिकारियों ने देश के भीतर भेजे जा रहे 13 पार्सलों और नीदरलैंड से आए 2 अंतरराष्ट्रीय पार्सलों से मादक पदार्थ बरामद किए। प्रारंभिक जांच से संकेत मिला है कि यह गिरोह विभिन्न शहरों में ड्रग्स भेजने के लिए कूरियर और डाक सेवाओं का इस्तेमाल करता था, जिससे उनकी गतिविधियां लंबे समय तक गुप्त बनी रहीं।

क्रिप्टोकरेंसी और एन्क्रिप्टेड संचार का इस्तेमाल

कार्रवाई के दौरान आरोपियों के पास से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए। जांच एजेंसियों को एक क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट का भी पता चला है, जिसका इस्तेमाल कथित रूप से ड्रग तस्करी से जुड़े वित्तीय लेनदेन के लिए किया जा रहा था। क्रिप्टोकरेंसी के उपयोग से तस्कर अपने वित्तीय लेनदेन को गुप्त रखने का प्रयास करते हैं। यह मामला दर्शाता है कि किस प्रकार आधुनिक तकनीक—डार्कनेट मार्केटप्लेस, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग और डिजिटल मुद्राएं—मिलकर अवैध गतिविधियों को संचालित करने में इस्तेमाल की जा रही हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) भारत के गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • डार्कनेट एन्क्रिप्टेड नेटवर्क होते हैं जिन्हें विशेष सॉफ्टवेयर जैसे टॉर के माध्यम से एक्सेस किया जाता है।
  • डार्कनेट लेनदेन में गुमनामी के कारण क्रिप्टोकरेंसी का व्यापक उपयोग होता है।
  • यूरोप में कुछ सिंथेटिक ड्रग्स के लिए नीदरलैंड को प्रमुख ट्रांजिट हब माना जाता है।

प्रारंभिक जांच के अनुसार “टीम कल्कि” नेटवर्क ने जनवरी 2025 से अब तक भारत के विभिन्न शहरों में 1,000 से अधिक ड्रग पार्सल भेजे हो सकते हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां जब्त किए गए उपकरणों और वित्तीय रिकॉर्ड का फॉरेंसिक विश्लेषण कर रही हैं, ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शनों की पहचान की जा सके। यह कार्रवाई साइबर माध्यम से संचालित ड्रग तस्करी से निपटने में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने बढ़ती चुनौतियों को भी उजागर करती है।

Originally written on March 11, 2026 and last modified on March 11, 2026.

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