एनसीईआरटी को ‘डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा मिलने की तैयारी: शिक्षा नीति में बड़े बदलाव की संभावना

एनसीईआरटी को ‘डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी’ का दर्जा मिलने की तैयारी: शिक्षा नीति में बड़े बदलाव की संभावना

भारत की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को दिशा देने वाला प्रमुख संस्थान राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) जल्द ही एक डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त कर सकता है। शिक्षा मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस दिशा में तैयारी पूरी हो चुकी है और प्रस्ताव को जनवरी 2026 के अंत तक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की बैठक में मंजूरी मिलने की संभावना है। यदि यह निर्णय लिया जाता है, तो यह भारत की शिक्षा नीति और अनुसंधान संरचना में एक बड़ा संस्थागत परिवर्तन होगा।

वर्तमान में NCERT की भूमिका

NCERT शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है, जिसका मुख्य कार्य स्कूली शिक्षा से संबंधित है। यह राष्ट्रीय पाठ्यचर्या ढांचा (National Curriculum Framework) तैयार करती है, केंद्र और कई राज्य बोर्डों के लिए पाठ्यपुस्तकें प्रकाशित करती है, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करती है और शैक्षिक अनुसंधान में योगदान देती है। हालांकि, वर्तमान में यह कोई डिग्री प्रदान नहीं करती और उच्च शिक्षा संस्थान के रूप में कार्यरत नहीं है।

डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा: क्या मिलेगा अधिकार?

भारत में डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी का दर्जा UGC अधिनियम, 1956 के तहत दिया जाता है। इसके लिए संस्था को किसी विशिष्ट शैक्षणिक क्षेत्र में उत्कृष्टता सिद्ध करनी होती है और यह दर्जा UGC की सिफारिश और केंद्र सरकार की स्वीकृति के बाद प्राप्त होता है।
एक बार दर्जा मिलने के बाद, संस्थान को निम्नलिखित अधिकार मिलते हैं:

  • अपने पाठ्यक्रमों को स्वायत्त रूप से डिजाइन करना,
  • प्रवेश मानदंड निर्धारित करना,
  • अपनी डिग्रियां (स्नातकोत्तर और डॉक्टोरल स्तर तक) प्रदान करना।
    भारत में वर्तमान में लगभग 145 डीम्ड विश्वविद्यालय हैं।

एनसीईआरटी की भूमिका में संभावित विस्तार

यदि एनसीईआरटी को यह दर्जा मिल जाता है, तो यह एक शोध-प्रधान संस्थान के रूप में उच्च शिक्षा पाठ्यक्रम संचालित कर सकेगा और औपचारिक डिग्रियां प्रदान कर सकेगा। इस प्रस्ताव की घोषणा सबसे पहले 2023 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की थी। इस पहल का उद्देश्य शिक्षा अनुसंधान को मज़बूत करना और वैश्विक अकादमिक साझेदारी को बढ़ावा देना है।

हालांकि इसकी वित्तीय सहायता स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के माध्यम से ही जारी रहेगी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इसका कार्यक्षेत्र स्कूली शिक्षा से जुड़ी नीतियों और परिणामों पर केंद्रित रहेगा।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा UGC अधिनियम, 1956 के अंतर्गत दिया जाता है।
  • इसके लिए UGC की सिफारिश और केंद्र सरकार की मंजूरी अनिवार्य होती है।
  • डीम्ड विश्वविद्यालय अपने पाठ्यक्रम, प्रवेश प्रक्रिया और डिग्रियां स्वायत्त रूप से निर्धारित कर सकते हैं।
  • NCERT एक स्वायत्त संस्था है जो स्कूली पाठ्यक्रम, किताबें, शिक्षक प्रशिक्षण और अनुसंधान में सक्रिय है।
  • एनसीईआरटी को विश्वविद्यालय का दर्जा देने की योजना की घोषणा 2023 में की गई थी।

शिक्षा नीति में बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

एनसीईआरटी को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा देना भारत की शिक्षा प्रणाली में एक संरचनात्मक परिवर्तन होगा। इससे पाठ्यचर्या निर्माण, शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षणिक अनुसंधान एक ही संस्थागत ढांचे में समाहित हो जाएंगे। यह संस्था की नीतिगत अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करेगा, शिक्षाशास्त्र और मूल्यांकन में विशेषीकृत प्रशिक्षण को बढ़ावा देगा, और पाठ्यचर्या सुधारों को अधिक साक्ष्य-आधारित व समन्वित रूप से लागू करने में सहायक होगा।

यह पहल भविष्य में भारत को वैश्विक शिक्षा नेतृत्व की दिशा में एक मजबूत स्थिति प्रदान कर सकती है, विशेषकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के व्यापक लक्ष्यों को क्रियान्वित करने में।

Originally written on January 3, 2026 and last modified on January 3, 2026.

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