एनएसटीएफडीसी के 25 वर्ष: आदिवासी सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम (एनएसटीएफडीसी) 10 अप्रैल को नई दिल्ली में अपना 25वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है। यह अवसर देशभर में अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक-आर्थिक विकास और वित्तीय समावेशन में संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है। पिछले दो दशकों में इस निगम ने आदिवासी समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कई प्रभावी कदम उठाए हैं।
स्थापना और संस्थागत ढांचा
एनएसटीएफडीसी की स्थापना वर्ष 2001 में जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत एक सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम के रूप में की गई थी। इसका उद्देश्य आदिवासी समुदायों के बीच मौजूद आर्थिक असमानताओं को दूर करना और उन्हें संगठित वित्तीय सहायता प्रदान करना था। समय के साथ यह संस्था अनुसूचित जनजातियों के लिए लक्षित योजनाओं को लागू करने में एक प्रमुख एजेंसी के रूप में उभरी है।
उद्देश्य और प्रमुख लक्ष्य
इस निगम का मुख्य उद्देश्य अनुसूचित जनजातियों के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक विकास को बढ़ावा देना है। यह विशेष रूप से स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने पर जोर देता है, जिससे आदिवासी समुदाय आत्मनिर्भर बन सकें। रियायती दरों पर वित्तीय सहायता और कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से यह संस्था उन्हें आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए सक्षम बनाती है।
प्रमुख कार्य और गतिविधियां
एनएसटीएफडीसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से आदिवासी समुदायों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है। यह राज्य स्तरीय चैनलाइजिंग एजेंसियों के जरिए योजनाओं का क्रियान्वयन करता है और लाभार्थियों को जागरूक करने का कार्य भी करता है। इसके अलावा, यह कौशल विकास और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों का आयोजन करता है तथा आय सृजन से जुड़ी गतिविधियों के लिए ऋण उपलब्ध कराता है। साथ ही, यह आदिवासी उत्पादों के विपणन को बढ़ावा देकर उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करता है।
संगठनात्मक संरचना और प्रशासन
इस निगम का संचालन एक निदेशक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें केंद्र सरकार, राज्य एजेंसियों और प्रमुख वित्तीय संस्थानों जैसे नाबार्ड और आईडीबीआई के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। इसके अलावा, ट्राइफेड और अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधियों को भी इसमें स्थान दिया गया है। यह समावेशी संरचना नीति निर्माण और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायक होती है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एनएसटीएफडीसी की स्थापना 2001 में जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत की गई थी।
- यह अनुसूचित जनजातियों को आय सृजन के लिए रियायती दरों पर वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
- राज्य चैनलाइजिंग एजेंसियां योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यस्थ की भूमिका निभाती हैं।
- ट्राइफेड भारत में आदिवासी उत्पादों के विपणन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
एनएसटीएफडीसी के 25 वर्षों का यह सफर दर्शाता है कि समर्पित प्रयासों और सही नीतियों के माध्यम से आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाया जा सकता है। आने वाले समय में यह संस्था और अधिक नवाचारों के साथ देश के समावेशी विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती रहेगी।