एक्सरसाइज सी ड्रैगन 2026 में भारतीय नौसेना की भागीदारी
भारतीय नौसेना ने अमेरिका के नेतृत्व में आयोजित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास एक्सरसाइज सी ड्रैगन 2026 में भाग लिया है, जो गुआम स्थित एंडरसन एयर फोर्स बेस पर आयोजित किया जा रहा है। यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में हर वर्ष आयोजित होता है और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच इसकी अहमियत और बढ़ गई है। भारत की भागीदारी क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा में उसकी बढ़ती भूमिका और सहयोगात्मक रणनीति को दर्शाती है।
अभ्यास की प्रकृति और दायरा
सी ड्रैगन 2026 एक दो सप्ताह का उच्च-स्तरीय सैन्य अभ्यास है, जिसका मुख्य उद्देश्य पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare – ASW) क्षमताओं को मजबूत करना है। इस अभ्यास में उन्नत समुद्री गश्ती विमान जैसे P-8A पोसाइडन और भारत का P-8I विमान शामिल हैं। इन विमानों के माध्यम से पनडुब्बियों का पता लगाना, उनका पीछा करना और उन्हें निष्क्रिय करने जैसे मिशनों का अभ्यास किया जाता है। अभ्यास में पहले काल्पनिक परिदृश्यों पर प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके बाद वास्तविक पनडुब्बियों की निगरानी की जाती है, जिससे प्रशिक्षण अधिक यथार्थवादी बनता है।
भारत की भागीदारी और क्षमताएं
भारतीय नौसेना ने इस अभ्यास में अपने अत्याधुनिक बोइंग P-8I समुद्री गश्ती विमान को तैनात किया है। यह विमान लंबी दूरी की निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें उन्नत रडार, सेंसर और हथियार प्रणाली लगी होती है, जो इसे समुद्री सुरक्षा के लिए एक शक्तिशाली साधन बनाती है। इस तरह के अंतरराष्ट्रीय अभ्यासों में भागीदारी से भारत की सैन्य दक्षता और अन्य देशों के साथ तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) में सुधार होता है।
बहुराष्ट्रीय सहयोग और भागीदारी
इस अभ्यास में भारत और अमेरिका के अलावा ऑस्ट्रेलिया, जापान और न्यूजीलैंड भी भाग ले रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने भी अपना P-8A विमान और लगभग 50 कर्मियों की टीम भेजी है। विभिन्न देशों की भागीदारी यह दर्शाती है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामूहिक सुरक्षा और सहयोग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इस तरह के अभ्यास देशों के बीच रणनीतिक समझ और सामंजस्य को बढ़ाते हैं।
वैश्विक संदर्भ में रणनीतिक महत्व
वर्तमान समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री प्रतिस्पर्धा और सुरक्षा चुनौतियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे में सी ड्रैगन जैसे अभ्यास देशों को अपनी रक्षा तैयारियों को मजबूत करने और पनडुब्बी खतरों से निपटने के लिए सक्षम बनाते हैं। यह अभ्यास महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने में भी सहायक है। इस प्रकार, यह वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- एक्सरसाइज सी ड्रैगन एक वार्षिक अमेरिकी नेतृत्व वाला पनडुब्बी रोधी सैन्य अभ्यास है।
- यह अभ्यास गुआम स्थित एंडरसन एयर फोर्स बेस पर आयोजित किया जाता है।
- भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान और न्यूजीलैंड इसमें भाग लेते हैं।
- P-8I भारत का उन्नत समुद्री गश्ती विमान है, जो पनडुब्बी रोधी अभियानों में उपयोग होता है।
एक्सरसाइज सी ड्रैगन 2026 में भारत की भागीदारी यह स्पष्ट करती है कि देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक मजबूत और जिम्मेदार समुद्री शक्ति के रूप में उभर रहा है। इस तरह के अभ्यास न केवल सैन्य क्षमता को बढ़ाते हैं, बल्कि वैश्विक सहयोग और स्थिरता को भी सुदृढ़ करते हैं।