एईपीसी के नए अध्यक्ष के रूप में ए. सक्थिवेल की नियुक्ति: परिधान निर्यात क्षेत्र में अनुभव और दिशा का संयोग
भारत के प्रमुख परिधान निर्यात प्रोत्साहन संगठन एपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के अध्यक्ष पद पर ए. सक्थिवेल की नियुक्ति उनके पांचवें कार्यकाल की शुरुआत है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारतीय परिधान उद्योग वैश्विक मांग की अस्थिरता, सस्टेनेबिलिटी की चुनौती और बदलती व्यापार नीतियों का सामना कर रहा है।
नेतृत्व में निरंतरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की तैयारी
AEPC भारत के परिधान निर्यातकों के लिए नीतिगत सहयोग, बाजार तक पहुंच, और निर्यात संवर्धन का प्रमुख मंच है। अध्यक्ष के रूप में सक्थिवेल भारत सरकार और उद्योग हितधारकों के साथ मिलकर भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता को बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे।
उनकी प्राथमिकताओं में नए निर्यात बाजारों की पहचान, आपूर्ति श्रृंखला में सस्टेनेबिलिटी अनुपालन और अमेरिका द्वारा लागू प्रतिकूल शुल्क नीतियों से निपटना शामिल है।
तिरुपुर को वैश्विक निटवियर केंद्र बनाने में भूमिका
ए. सक्थिवेल को दक्षिण भारत के तिरुपुर को वैश्विक निटवियर केंद्र में बदलने का श्रेय दिया जाता है। वर्ष 1984 में तिरुपुर से परिधान निर्यात जहां लगभग ₹15 करोड़ था, वहीं 2024–25 तक यह ₹45,000 करोड़ तक पहुंच गया।
इस वृद्धि का आधार विशेषीकरण, उत्पादन में पैमाना, और पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण पद्धतियाँ रही हैं, जिससे तिरुपुर भारत के परिधान निर्यात ढांचे का एक अहम स्तंभ बन गया है।
सरकार के साथ संवाद और निर्यात सहायता
पदभार संभालने के बाद सक्थिवेल ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) निर्यातकों के लिए ब्याज सहायता योजना की सीमा में वृद्धि की मांग की।
इस पहल का उद्देश्य बढ़ती लागत और वैश्विक ऋण कठिनाइयों के बीच निर्यात गति बनाए रखना और निर्यातकों की तरलता को सुदृढ़ करना है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- AEPC भारत में परिधान निर्यात को बढ़ावा देने वाली शीर्ष संस्था है।
- तिरुपुर भारत का प्रमुख निटवियर (बुना हुआ वस्त्र) निर्यात केंद्र है।
- ब्याज सबवेंशन योजनाएँ निर्यातकों को रियायती ब्याज दरों पर ऋण प्रदान करती हैं।
- अमेरिकी टैरिफ नीतियाँ भारतीय परिधान निर्यात की प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करती हैं।
नए कार्यकाल की प्राथमिकताएँ
अपने पांचवें कार्यकाल में ए. सक्थिवेल का ध्यान बाजार विविधीकरण, वैश्विक खरीदारों के साथ समन्वय, और सस्टेनेबिलिटी अनुपालन पर केंद्रित रहेगा।
इसके अतिरिक्त, गैर-शुल्क बाधाओं (non-tariff barriers) से निपटना, निर्यातकों के लिए कारोबारी सुगमता बढ़ाना, और पर्यावरणीय व श्रम मानकों के साथ समरसता स्थापित करना उनके एजेंडे में शामिल हैं।
सक्थिवेल के नेतृत्व में AEPC का लक्ष्य भारत को वैश्विक परिधान मूल्य श्रृंखला में एक मजबूत और उत्तरदायी भागीदार के रूप में स्थापित करना है।