एआई इम्पैक्ट स्टार्टअप बुक से उभरा भारत का उभरता कृत्रिम बुद्धिमत्ता पारिस्थितिकी तंत्र
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में “एआई इम्पैक्ट स्टार्टअप बुक” का अनावरण किया, जो भारत के कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डीप-टेक स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का व्यापक दस्तावेज प्रस्तुत करती है। यह प्रकाशन देश में एआई नवाचार की बढ़ती परिपक्वता, विविधता और वैश्विक विस्तार को रेखांकित करता है। इसमें विभिन्न स्टार्टअप्स से प्राप्त अंतर्दृष्टियों के आधार पर उभरते तकनीकी रुझानों और क्षेत्रीय विकास का विश्लेषण किया गया है। यह दस्तावेज भारत को सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में एआई आधारित समाधानों के एक महत्वपूर्ण वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत के विस्तारित एआई पारिस्थितिकी तंत्र का मानचित्रण
रिपोर्ट के अनुसार स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई स्टार्टअप्स की मजबूत उपस्थिति है। इसके साथ ही फाउंडेशन मॉडल, डेटाबेस विकास और स्वदेशी एआई अवसंरचना में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। स्टार्टअप्स अपशिष्ट प्रबंधन तकनीक, भारतीय भाषाओं के अनुकूल वॉयस और विज़न आधारित एप्लिकेशन तथा हार्डवेयर के साथ एकीकृत एज एआई समाधानों का विकास कर रहे हैं।
प्रारंभिक चरण के लगभग 47 प्रतिशत उद्यमों की मजबूत स्थानीय उपस्थिति है, जबकि विकास चरण के 68 प्रतिशत स्टार्टअप्स अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय हैं। यह रुझान वैश्विक बाजारों में भारतीय एआई समाधानों की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। साथ ही, नवाचार का भौगोलिक विस्तार महानगरों से बाहर भी देखने को मिल रहा है, जो तकनीकी लोकतंत्रीकरण की दिशा में सकारात्मक संकेत है।
अवसंरचना से आगे नागरिक प्रभाव पर जोर
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के महानिदेशक और मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि एआई की सफलता केवल तकनीकी अवसंरचना निर्माण से नहीं, बल्कि नागरिकों पर उसके वास्तविक प्रभाव से मापी जानी चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा और रोजगार जैसे क्षेत्रों में एआई के प्रभावी उपयोग पर बल दिया।
यह संकलन विभिन्न मंत्रालयों और राज्य सरकारों के लिए एक संदर्भ दस्तावेज के रूप में कार्य करेगा, जिससे वे एआई समाधानों की परिपक्वता और व्यवहारिक उपयोगिता का मूल्यांकन कर सकें। उदाहरण के रूप में बहुभाषी कृषि परामर्श प्रणालियों का उल्लेख किया गया, जो विविध भाषाई समुदायों तक अंतिम मील सेवा पहुँचाने में सहायक हो सकती हैं।
उपयोग-आधारित नवाचार के विस्तार की दिशा
भारत की एआई यात्रा का अगला चरण पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़कर व्यापक कार्यान्वयन पर केंद्रित होगा। रिपोर्ट में 100 एआई समाधानों की सूची दी गई है और आगामी 12 से 18 महीनों में कम से कम 10 प्रभावशाली समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस रणनीति का उद्देश्य भारत को अनुप्रयुक्त एआई नवाचार का वैश्विक “यूज-केस कैपिटल” बनाना है।
उद्योग विशेषज्ञों द्वारा साझा किए गए निष्कर्षों में स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल का विकास, एज एआई में प्रगति और विकास चरण के स्टार्टअप्स का वैश्विक विस्तार जैसे प्रमुख रुझान शामिल हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
* इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत में एआई और डिजिटल शासन पहलों का प्रमुख मंत्रालय है।
* राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
* एआई इम्पैक्ट स्टार्टअप बुक में 100 भारतीय एआई समाधानों का मानचित्रण किया गया है।
* स्वास्थ्य क्षेत्र और फाउंडेशन मॉडल भारत के एआई पारिस्थितिकी तंत्र के प्रमुख विकास क्षेत्र हैं।
इस पहल से स्पष्ट होता है कि भारत का एआई स्टार्टअप परिदृश्य अब प्रयोगात्मक चरण से आगे बढ़कर परिपक्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के योग्य बन चुका है। सुदृढ़ नीतिगत समर्थन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के साथ भारत अब ऐसे एआई समाधानों की ओर अग्रसर है, जो न केवल घरेलू जरूरतों को पूरा करें, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रभावशाली भूमिका निभाएँ।