एआई आधारित ‘अनावरण’ पोर्टल से वनों की कटाई अलर्ट जारी करना बंद

एआई आधारित ‘अनावरण’ पोर्टल से वनों की कटाई अलर्ट जारी करना बंद

भारत के वन संसाधनों की निगरानी करने वाली केंद्रीय संस्था फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) ने अपने एआई आधारित अनावरण डिफॉरेस्टेशन अलर्ट सिस्टम के माध्यम से जारी होने वाले पखवाड़ा अलर्ट को फिलहाल बंद कर दिया है। यह पोर्टल उपग्रह आंकड़ों और मशीन लर्निंग तकनीक की मदद से वन क्षेत्र में होने वाले बदलावों का लगभग वास्तविक समय में पता लगाने के लिए विकसित किया गया था। हालांकि नवंबर 2025 के बाद से इस प्रणाली में कोई नया अपडेट नहीं हुआ है और जनवरी 2026 से सक्रिय निगरानी भी बंद हो गई। पहले यह पोर्टल हर 15 दिन में राज्यों को अलर्ट भेजता था, जिससे संबंधित स्थानों पर मैदानी जांच की जा सके।

अनावरण प्रणाली और इसके उद्देश्य

अनावरण डिफॉरेस्टेशन अलर्ट सिस्टम जनवरी 2024 से कार्यरत था और इसका उद्देश्य देशभर में वनों की कटाई की त्वरित पहचान करना था। यह प्रणाली उपग्रह चित्रों का विश्लेषण करके किसी क्षेत्र में वन आवरण में हुए बदलाव का पता लगाती थी। पोर्टल पुराने और नए उपग्रह चित्रों की तुलना करके उन स्थानों की पहचान करता था जहां हाल ही में पेड़ों की कटाई हुई हो। इसके बाद संबंधित स्थान की सटीक जानकारी राज्य के वन विभागों को भेजी जाती थी। इस प्रणाली के डेटा प्रसंस्करण के लिए गूगल अर्थ इंजन प्लेटफॉर्म का उपयोग किया गया था। अधिकारियों के अनुसार यह प्रणाली अभी तक एक पायलट परियोजना के रूप में ही संचालित की जा रही थी और इसकी प्रभावशीलता की समीक्षा की जा रही है।

निगरानी प्रणाली के पीछे की तकनीक

इस प्लेटफॉर्म ने वन क्षेत्र की निगरानी के लिए कई प्रकार के उपग्रह डेटा का उपयोग किया। मुख्य रूप से सेंटिनल-2 ऑप्टिकल उपग्रह चित्रों का इस्तेमाल वन आवरण में होने वाले बदलावों की पहचान के लिए किया जाता था। वहीं बादलों या मानसून के दौरान निगरानी बनाए रखने के लिए सेंटिनल-1 सिंथेटिक एपर्चर रडार डेटा का उपयोग किया जाता था। एल्गोरिदम ऐतिहासिक मौसमी आंकड़ों के साथ तुलना करके वनस्पति में होने वाले बदलावों को पहचानता था और संभावित वनों की कटाई वाले क्षेत्रों को चिन्हित करता था। इस तकनीक के माध्यम से लगभग 10 से 20 मीटर की उच्च स्थानिक रेजोल्यूशन पर निगरानी संभव थी।

अलर्ट डेटा और राज्यों में स्थिति

अनावरण पोर्टल के रिकॉर्ड के अनुसार जनवरी 2024 से अक्टूबर 2025 के बीच एफएसआई ने कुल 12,351 डिफॉरेस्टेशन अलर्ट जारी किए थे। इसका औसत लगभग 561 अलर्ट प्रति माह रहा। नवंबर से मार्च के बीच इन अलर्ट की संख्या में अधिक वृद्धि देखी गई क्योंकि इस अवधि में मौसम अनुकूल होने के कारण मानवीय गतिविधियों से वनों की कटाई की घटनाएं अधिक होती हैं। पंजाब, आंध्र प्रदेश और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में सबसे अधिक अलर्ट दर्ज किए गए, जबकि नागालैंड, मणिपुर, उत्तराखंड, असम और त्रिपुरा भी प्रमुख राज्यों में शामिल रहे। कई राज्य वन विभागों ने पुष्टि की है कि उन्हें दिसंबर 2025 के बाद से ऐसे अलर्ट प्राप्त नहीं हुए।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (एफएसआई) पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • अनावरण एक एआई आधारित प्रणाली थी जो उपग्रह चित्रों और मशीन लर्निंग के माध्यम से वनों की कटाई की निगरानी करती थी।
  • सेंटिनल-1 और सेंटिनल-2 उपग्रह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी द्वारा संचालित पृथ्वी अवलोकन मिशनों का हिस्सा हैं।
  • एफएसआई भारत में वन आग की निगरानी के लिए वैन अग्नि पोर्टल भी संचालित करता है।

अनावरण प्रणाली को विशेषज्ञों ने भारत में उपग्रह आधारित वन निगरानी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना है। लैटिन अमेरिका में टेरा-आई जैसे प्लेटफॉर्म भी इसी प्रकार दूरसंवेदी तकनीक के माध्यम से वनों की कटाई पर नजर रखते हैं। भविष्य में यदि इस प्रणाली को और बेहतर बनाया जाए तथा राज्यों से प्राप्त अनुभवों के आधार पर इसे मजबूत किया जाए, तो ऐसी तकनीक आधारित पहलें भारत में वन संरक्षण और अवैध कटाई की समय पर पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

Originally written on March 11, 2026 and last modified on March 11, 2026.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *