एंटरप्राइज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारत बना वैश्विक शक्ति, साइबर सुरक्षा बनी बड़ी चुनौती
भारत ने एंटरप्राइज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति को और सशक्त किया है। Zscaler द्वारा जारी ThreatLabz 2026 AI Security Report के अनुसार, भारत अब इस क्षेत्र में अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा उपयोगकर्ता बन चुका है। यह रिपोर्ट जहां भारत की डिजिटल प्रगति को रेखांकित करती है, वहीं बढ़ते साइबर जोखिमों की ओर भी इशारा करती है।
वैश्विक एआई उपयोग में भारत की भागीदारी
जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच Zscaler Zero Trust Exchange प्लेटफॉर्म पर हुए लगभग एक ट्रिलियन AI/ML ट्रांजेक्शनों का विश्लेषण किया गया। इसमें भारत ने अकेले जून से दिसंबर 2025 के बीच 82.3 अरब ट्रांजेक्शन दर्ज किए—जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कुल AI लेनदेन का 46.2% हिस्सा है।
इस बढ़ोत्तरी का मुख्य श्रेय सरकार की डिजिटल पहलों, AI अवसंरचना में भारी निवेश और तेजी से बढ़ते AI-कुशल कार्यबल को दिया जा रहा है। यह भारत के AI क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ते कदम का संकेत है।
क्षेत्रों के अनुसार AI वृद्धि के प्रमुख कारक
भारत में AI को अपनाने में सबसे आगे प्रौद्योगिकी और संचार क्षेत्र रहा, जिसमें 31.3 अरब ट्रांजेक्शन दर्ज किए गए। इसके बाद उत्पादन क्षेत्र (15.7 अरब), सेवाएँ (12.6 अरब), और वित्त एवं बीमा (12.2 अरब) का स्थान रहा।
क्लाउड-प्रथम एंटरप्राइज आर्किटेक्चर और व्यापार प्रक्रियाओं में AI का गहन एकीकरण इन क्षेत्रों में तेज़ी से और व्यापक स्तर पर AI सेवाओं को लागू करने में सहायक रहा है।
साइबर सुरक्षा में कमजोरियाँ और “Agentic AI” का उभार
हालांकि AI को लेकर भारत की प्रगति उल्लेखनीय है, रिपोर्ट में सुरक्षा तैयारियों को लेकर गंभीर चिंताएं भी व्यक्त की गई हैं। अधिकांश संगठनों के पास अपने सक्रिय AI मॉडलों की समुचित सूची तक नहीं है, जिससे संवेदनशील डेटा के रिसाव का खतरा बढ़ जाता है।
विशेष चिंता “Agentic AI” को लेकर है—ऐसे स्वायत्त AI सिस्टम जो स्वतंत्र रूप से योजना बना सकते हैं और कार्य कर सकते हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि जब इन सिस्टम्स का विरोधी परिस्थितियों में परीक्षण किया गया, तो अधिकांश AI सिस्टम केवल 16 मिनट के भीतर विफल हो गए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- भारत, एंटरप्राइज AI/ML ट्रांजेक्शनों में अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा देश है।
- भारत का AI उपयोग एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कुल लेनदेन का 46% से अधिक है।
- Agentic AI वे सिस्टम हैं जो स्वयं निर्णय लेने और कार्य करने में सक्षम होते हैं।
- Zero Trust आर्किटेक्चर को AI-संचालित संस्थानों की साइबर सुरक्षा के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।
डेटा जोखिम और Zero Trust सुरक्षा की आवश्यकता
AI प्लेटफॉर्म अब कॉर्पोरेट इंटेलिजेंस के केंद्रीकृत भंडार बन चुके हैं। वर्ष 2025 में वैश्विक रूप से 18,000 टेराबाइट से अधिक डेटा AI अनुप्रयोगों में प्रवाहित किया गया, जिससे लाखों Data Loss Prevention उल्लंघन सामने आए।
जैसे-जैसे साइबर अपराधी और राज्य समर्थित तत्व AI को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक साइबर सुरक्षा उपाय अब पर्याप्त नहीं हैं। Zero Trust Security—जिसमें निरंतर निगरानी, सख्त डेटा नियंत्रण और AI-संचालित सुरक्षा उपाय शामिल हैं—को भारत के तेजी से बढ़ते AI इकोसिस्टम की सुरक्षा के लिए अनिवार्य माना जा रहा है।
AI क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका जहां एक ओर आर्थिक और तकनीकी संभावनाओं के नए द्वार खोल रही है, वहीं यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि सुरक्षा ढांचे उतनी ही तेजी से विकसित हों।