उर्दू में आई “खुत्बात-ए-मोदी”: स्वतंत्रता दिवस भाषणों का संकलन
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 से 2025 तक लाल किले से दिए गए स्वतंत्रता दिवस भाषणों का उर्दू संकलन “खुत्बात-ए-मोदी: लाल किला की फसील से” शीर्षक से जारी किया है। इस पुस्तक का उद्देश्य उर्दू पाठकों को राष्ट्रीय संबोधनों तक प्रत्यक्ष पहुंच देना और सार्वजनिक संवाद में भाषाई समावेशन को सुदृढ़ करना है।
उर्दू पाठकों के लिए वार्षिक भाषणों का विशेष संकलन
यह पुस्तक राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रचार परिषद (NCPUL) द्वारा प्रकाशित की गई है, जो शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है और पूरे भारत में उर्दू के प्रचार-प्रसार का कार्य करती है। पुस्तक का उद्देश्य यह है कि उर्दू जानने वाले नागरिक प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के भाषणों से सीधे जुड़ सकें, बजाय इसके कि वे केवल अनुवाद या सारांश पर निर्भर रहें।
समावेशिता और जनसंपर्क की दिशा में एक सार्थक पहल
पुस्तक विमोचन के अवसर पर शिक्षा मंत्री ने इसे भाषाई समावेशन की दिशा में एक सार्थक कदम बताया। उन्होंने कहा कि लाल किले से दिए गए प्रधानमंत्री के भाषणों में “अंत्योदय”, गरीब कल्याण, स्वच्छ भारत, राष्ट्रीय एकता और 140 करोड़ देशवासियों की आकांक्षाओं की बात लगातार होती रही है। इस दृष्टिकोण को “नए भारत” के निर्माण की संकल्पना से जोड़ा गया है। प्रधान ने यह भी कहा कि इस प्रकार के प्रकाशन आम नागरिकों और नीतिगत संवाद के बीच सेतु का कार्य कर सकते हैं।
भारत की विरासत पर उर्दू साहित्य को बढ़ाने का आह्वान
प्रधान ने आशा जताई कि यह पुस्तक देशभर की लाइब्रेरीज़ में पहुंचेगी और छात्र, शोधकर्ता व आम पाठक इसका लाभ उठाएंगे। उन्होंने NCPUL से अनुरोध किया कि भारत की विरासत, संस्कृति, जीवनशैली और ज्ञान परंपराओं से जुड़ी अधिक सामग्री उर्दू में प्रकाशित की जाए, ताकि भाषा के माध्यम से सांस्कृतिक निरंतरता और सार्वजनिक भागीदारी को प्रोत्साहन मिल सके।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- NCPUL (राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रचार परिषद) शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त निकाय है।
- प्रधानमंत्री हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर नई दिल्ली के लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हैं।
- अंत्योदय का तात्पर्य समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान से संबंधित नीतियों से है।
- भाषाई प्रोत्साहन संस्थाएँ पुस्तकों, पुस्तकालयों और शैक्षिक संसाधनों के माध्यम से कार्य करती हैं।
प्रधानमंत्री के एक दशक के संबोधनों का यह उर्दू संकलन केवल भाषाई पहुंच का माध्यम नहीं, बल्कि नीति संवाद का एक दस्तावेज है। इससे न केवल भाषाई समावेशन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श को बहुभाषी समाज तक पहुंचाने में भी मदद मिलेगी।