उपभोक्ता विश्वास में भारत दुनिया में दूसरे स्थान पर: जनवरी 2026 में आर्थिक आशावाद में बढ़त
जनवरी 2026 में भारत दुनिया का दूसरा सबसे आशावादी उपभोक्ता बाजार बनकर उभरा है। यह संकेत देता है कि देश में आर्थिक संभावनाओं और रोजगार की स्थिति को लेकर उपभोक्ताओं में मजबूत विश्वास है। LSEG–Ipsos प्राइमरी कंज़्यूमर सेंटिमेंट इंडेक्स (PCSI) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत का प्रदर्शन केवल इंडोनेशिया से पीछे रहा, जो साल की शुरुआत में मजबूत घरेलू मांग और सकारात्मक विकास परिदृश्य को दर्शाता है।
वैश्विक रैंकिंग में भारत की स्थिति
PCSI के अनुसार, भारत का स्कोर जनवरी 2026 में 60.7 रहा, जो पिछले महीने की तुलना में 1.4 प्रतिशत अंक की वृद्धि को दर्शाता है। 30 देशों के इस सर्वेक्षण में केवल इंडोनेशिया (स्कोर 62.6) भारत से आगे रहा। ये दो ही देश थे जिन्होंने 60 अंकों की सीमा पार की, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इन देशों में उपभोक्ता आशावाद अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत है।
आर्थिक और रोजगार को लेकर बढ़ता विश्वास
भारत के स्कोर में यह वृद्धि मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था और रोजगार से जुड़े सकारात्मक अनुमानों के कारण हुई।
- Economic Expectations Sub-Index में 6.6 अंकों की तेज़ बढ़त देखी गई।
- Employment Sub-Index में 6.3 अंकों की वृद्धि दर्ज हुई।
यह दोनों संकेतक इस ओर इशारा करते हैं कि उपभोक्ता आने वाले समय में आर्थिक गतिविधियों और नौकरी के अवसरों को लेकर अधिक आशावान हैं।
व्यक्तिगत वित्त और निवेश को लेकर सतर्कता
हालांकि समग्र आशावाद में वृद्धि हुई है, कुछ क्षेत्रों में सावधानीपूर्ण दृष्टिकोण भी देखा गया:
- Current Personal Financial Conditions Sub-Index में 0.6 अंकों की गिरावट आई।
- Investment Climate Sub-Index में 2.0 अंकों की गिरावट दर्ज हुई।
यह संकेत देता है कि जबकि लोग देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर सकारात्मक दृष्टिकोण रखते हैं, वे अपने व्यक्तिगत वित्त और निवेश निर्णयों को लेकर अब भी सतर्क हैं।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जनवरी 2026 में भारत उपभोक्ता विश्वास के मामले में विश्व में दूसरे स्थान पर रहा।
- भारत का LSEG–Ipsos PCSI स्कोर 60.7 रहा।
- इंडोनेशिया 62.6 अंकों के साथ पहले स्थान पर रहा।
- यह सर्वेक्षण 30 देशों में 21,000 से अधिक वयस्कों पर आधारित है।
वैश्विक प्रवृत्तियाँ और सर्वेक्षण की पृष्ठभूमि
वैश्विक स्तर पर Global Consumer Confidence Index में मामूली सुधार देखा गया, जो उपभोक्ताओं के मूड में धीरे-धीरे आ रहे सुधार को दर्शाता है। यह मासिक सर्वेक्षण Ipsos द्वारा प्रकाशित किया जाता है और 75 वर्ष से कम आयु के उत्तरदाताओं को शामिल करता है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मिश्रित रुझान देखने को मिले, लेकिन भारत की मजबूत स्थिति इसे 2026 की शुरुआत में वैश्विक उपभोक्ता भावनाओं के प्रमुख उज्ज्वल बिंदु (bright spot) के रूप में प्रस्तुत करती है।
भारत की यह रैंकिंग न केवल उसके आर्थिक परिदृश्य में विश्वास को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक निवेशकों और नीति निर्माताओं के लिए भी सकारात्मक संकेत है।