उत्तर सिक्किम में चुंगथांग–लाचेन मार्ग और तरम चू पुल बहाल, आपदा के बाद बड़ी उपलब्धि
रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने उत्तर सिक्किम में पुनर्निर्मित चुंगथांग–लाचेन धुरी मार्ग तथा 400 फुट लंबे बेली सस्पेंशन तरम चू पुल का उद्घाटन किया। यह परियोजना सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा ‘प्रोजेक्ट स्वास्तिक’ के तहत पूरी की गई है। हाल के वर्षों में आए बादल फटने की घटनाओं, चक्रवात रेमल और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) जैसी प्राकृतिक आपदाओं से क्षेत्र की कनेक्टिविटी बुरी तरह प्रभावित हुई थी। ऐसे में यह पुनर्बहाली उत्तर सिक्किम के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
व्यापक इंजीनियरिंग और पुनर्निर्माण प्रयास
संचार लाइनों की बहाली के लिए बीआरओ ने 96 भूस्खलनों को हटाया, चार बड़े पुलों का निर्माण किया और दो अन्य पुलों की मरम्मत की। इसके अलावा आठ किलोमीटर नए मार्ग का निर्माण (फॉर्मेशन कटिंग) किया गया तथा अस्थिर ढलानों और धंसते क्षेत्रों से बचने के लिए वैकल्पिक डायवर्जन तैयार किए गए।
यह कार्य अक्टूबर 2025 में 7.5 किलोमीटर लंबे नागा–टूंग खंड के पुनः खुलने के बाद किया गया, जिससे उत्तर सिक्किम के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में सड़क संपर्क और मजबूत हुआ। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में इस प्रकार का निर्माण कार्य उच्च तकनीकी दक्षता और निरंतर प्रयास की मांग करता है।
सामरिक और नागरिक महत्व
28 किलोमीटर लंबे चुंगथांग–लाचेन मार्ग और तरम चू पुल के पूर्ण होने से स्थानीय निवासियों, सुरक्षा बलों और क्षेत्रीय व्यापार को बड़ा लाभ मिलेगा। यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निकट स्थित होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
बेहतर सड़क संपर्क से सेना की आवाजाही, रसद आपूर्ति और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता में सुधार होगा। साथ ही, उत्तर सिक्किम के दुर्गम क्षेत्रों में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय आजीविका को मजबूती मिलेगी।
अवसंरचना और राष्ट्रीय दृष्टि
इस परियोजना का उद्घाटन ‘आत्मनिर्भर सिक्किम–विकसित भारत’ की व्यापक अवधारणा के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सुदृढ़ और आपदा-प्रतिरोधी अवसंरचना का विकास करना है। हिमालयी क्षेत्र भूस्खलन, बाढ़ और चरम मौसम की घटनाओं के प्रति अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए यहां दीर्घकालिक और टिकाऊ निर्माण पर विशेष बल दिया जा रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) रक्षा मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।
- बेली ब्रिज एक पोर्टेबल और पूर्वनिर्मित ट्रस पुल होता है, जिसे तेजी से स्थापित किया जा सकता है।
- ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) हिमनदीय झील से अचानक जल प्रवाह की घटना है।
- सिक्किम की सीमाएँ चीन, भूटान और नेपाल से लगती हैं।
रक्षा राज्य मंत्री ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बीआरओ के निरंतर योगदान की सराहना की। यह परियोजना दर्शाती है कि भारत आपदा-प्रवण और पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में भी मजबूत और लचीली अवसंरचना विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उत्तर सिक्किम में बहाल हुई यह कनेक्टिविटी न केवल रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय विकास और सामुदायिक सशक्तिकरण की दिशा में भी एक निर्णायक कदम है।