उत्तर प्रदेश में छह नए उत्तर-दक्षिण रोड कॉरिडोर को मंजूरी: क्षेत्रीय संतुलन और संपर्क को मिलेगा बढ़ावा
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में लंबे समय से चली आ रही उत्तर-दक्षिण संपर्क की कमी को दूर करने के लिए छह नए रोड कॉरिडोर की योजना को मंजूरी दे दी है। यह योजना 24 से अधिक जिलों को आपस में जोड़ने, उत्तर और दक्षिण भागों के बीच यात्रा समय को घटाने तथा क्षेत्रीय संतुलित विकास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इससे लॉजिस्टिक्स क्षमता, निवेश के अवसर और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी होने की संभावना है।
उत्तर-दक्षिण संपर्क के लिए रणनीतिक पहल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा इस योजना को औपचारिक मंजूरी प्रदान की गई है, जो राज्य के अब तक पूर्व-पश्चिम एक्सप्रेसवे केंद्रित दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है। बीते दो वर्षों से मुख्यमंत्री ने इस ‘वर्टिकल कनेक्टिविटी’ की आवश्यकता को रेखांकित किया है और इसे केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के समक्ष भी प्रमुखता से उठाया था। योजना को निष्पादित करने के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की है और जल्द ही लागत अनुमानों को कैबिनेट से स्वीकृति मिलने की संभावना है।
पूर्वांचल में प्रमुख कॉरिडोर
इन छह कॉरिडोर में से एक प्रमुख मार्ग श्रावस्ती से प्रयागराज तक 262 किमी की दूरी तय करेगा, जो अयोध्या, सुल्तानपुर और प्रतापगढ़ होते हुए गुजरेगा। इस मार्ग के कई हिस्से छह लेन वाले ग्रीनफील्ड राजमार्ग के रूप में विकसित किए जाएंगे ताकि यह मौजूदा एक्सप्रेसवे जैसे पूर्वांचल, गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़े।
दूसरा महत्वपूर्ण कॉरिडोर कुशीनगर को वाराणसी से जोड़ेगा, जो देवरिया और गाज़ीपुर से होते हुए गुजरेगा। इस पर आंशिक रूप से उन्नयन कार्य पहले से चल रहा है और आगे के कार्यों के लिए ₹342 करोड़ की लागत का अनुमान है।
सीमावर्ती, बुंदेलखंड और केंद्रीय क्षेत्र के मार्ग
नेपाल सीमा पर स्थित पिपरी से प्रयागराज तक 295 किमी लंबा एक और कॉरिडोर भारत-नेपाल सीमा से लेकर राज्य के भीतरी क्षेत्रों को जोड़ेगा। इसमें PWD, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन मंत्रालय की भागीदारी होगी।
एक अन्य प्रमुख 502 किमी लंबा मार्ग लखीमपुर से बांदा तक जाएगा, जो सीतापुर, लखनऊ और बुंदेलखंड क्षेत्र से होकर गुजरेगा। यह औद्योगिक और कृषि प्रधान क्षेत्रों की पहुंच को बेहतर बनाएगा।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- उत्तर प्रदेश सरकार ने छह उत्तर-दक्षिण रोड कॉरिडोर को मंजूरी दी है, जो 24 से अधिक जिलों को जोड़ेगा।
- ये कॉरिडोर पूर्वांचल, गंगा और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे मौजूदा राजमार्गों से जुड़ेंगे।
- परियोजना का कार्यान्वयन PWD और NHAI जैसी राज्य और केंद्रीय एजेंसियों द्वारा किया जाएगा।
- सभी छह कॉरिडोर का निर्माण कार्य दो वर्षों के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है।
सबसे लंबा मार्ग और निर्माण समयरेखा
इस परियोजना का सबसे लंबा कॉरिडोर बरेली से ललितपुर तक 547 किमी लंबा होगा, जो आगरा और झांसी होते हुए कई प्रमुख एक्सप्रेसवे को जोड़कर राज्य के मध्य भाग में एक सतत परिवहन धारा तैयार करेगा। एक और कॉरिडोर पीलीभीत से हरपालपुर तक जाएगा, जो वन क्षेत्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और बुंदेलखंड क्षेत्र को जोड़ने का कार्य करेगा।
इन सभी परियोजनाओं पर निर्माण कार्य कैबिनेट की अंतिम स्वीकृति के बाद शुरू होगा और निर्धारित लक्ष्य के अनुसार अगले दो वर्षों में सभी कॉरिडोर पूरे कर लिए जाएंगे। यह पहल उत्तर प्रदेश के अधोसंरचना विकास में एक नया अध्याय जोड़ेगी और राज्य की क्षेत्रीय असमानता को दूर करने में सहायक होगी।