उत्तरायण पर्व पर गुजरात में करुणा अभियान के तहत वन्यजीव संरक्षण को मिला बल
उत्तरायण पर्व के आगमन से पहले गुजरात सरकार ने वन्यजीवों की रक्षा के लिए व्यापक स्तर पर करुणा अभियान की शुरुआत करते हुए चौकसी और तैयारियों को तेज़ कर दिया है। पतंगबाज़ी के दौरान पक्षियों और जानवरों को होने वाली चोटों को देखते हुए राज्य प्रशासन ने इस बार व्यापक इमरजेंसी प्रबंधन प्रणाली सक्रिय की है। अभियान का उद्देश्य हानिकारक मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना और समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना है।
इमरजेंसी तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने अहमदाबाद स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र का दौरा किया, जहाँ उन्होंने करुणा अभियान के अंतर्गत किए गए इंतज़ामों का जायज़ा लिया। यह समीक्षा विशेष रूप से पर्व के दो दिनों के दौरान चिकित्सा सुविधा, समन्वय प्रणाली और त्वरित कार्रवाई क्षमता पर केंद्रित रही।
राज्य सरकार की इस पहल का लक्ष्य है कि पर्व की उल्लासपूर्ण पतंगबाज़ी को वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ संतुलित किया जा सके।
राज्यभर में वन्यजीव बचाव दल की तैनाती
करुणा अभियान के अंतर्गत गुजरात में कुल 728 पशु चिकित्सक और 8,620 प्रशिक्षित स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है। इन बचाव दलों की ज़िम्मेदारी है:
- घायल पक्षियों और जानवरों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाना।
- प्राथमिक उपचार एवं ज़रूरत पड़ने पर गहन चिकित्सा सहायता देना।
- वन्यजीव बचाव कार्यों का समन्वय और सूचना प्रबंधन।
इन प्रयासों के समर्थन में राज्यभर में 1,036 उपचार एवं संग्रहण केंद्रों को पूरी तरह क्रियाशील किया गया है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में तेज़ सहायता पहुँच सके।
नागरिक भागीदारी और डिजिटल सुविधा
राज्य सरकार ने आम नागरिकों को अभियान में जोड़ने के लिए डिजिटल माध्यमों को सक्रिय किया है। एक समर्पित WhatsApp नंबर पर संदेश भेजकर नागरिक निकटतम पक्षी उपचार केंद्र की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
यह डिजिटल सुविधा प्रतिक्रिया समय को कम करने और घायल पक्षियों तक शीघ्र उपचार पहुँचाने में सहायक सिद्ध हो रही है। इसके माध्यम से सामाजिक सहभागिता भी बढ़ रही है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- उत्तरायण पर्व मकर संक्रांति के अवसर पर गुजरात में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
- करुणा अभियान गुजरात सरकार की वन्यजीव कल्याण और पक्षी सुरक्षा हेतु विशेष पहल है।
- सिंथेटिक मांझा पक्षियों के लिए अत्यंत घातक होता है, जिससे गंभीर चोटें लगती हैं।
- वन्यजीव बचाव दल में पशु चिकित्सकों और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की भागीदारी होती है।
उत्तरायण का पर्व जहाँ सामाजिक और सांस्कृतिक उल्लास का प्रतीक है, वहीं इससे जुड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए गुजरात सरकार का करुणा अभियान एक सराहनीय कदम है। यह पहल न केवल वन्यजीवों की रक्षा सुनिश्चित करती है बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और मानवीय संवेदनशीलता की दिशा में एक सशक्त संदेश भी देती है।