उत्तराखंड में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड का विस्तृत सुधार और प्रभाव

उत्तराखंड में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड का विस्तृत सुधार और प्रभाव

उत्तराखंड ने अपने ऐतिहासिक यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (UCC) ढांचे को और अधिक सुदृढ़ करते हुए यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को लागू कर दिया है। यह कदम विशेष रूप से UCC लागू होने के एक वर्ष पूरा होने पर उठाया गया है, जिसका उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना तथा भारत के अद्यतन कानूनी कोडों के अनुरूप दंडात्मक प्रावधानों को संरेखित करना है। इस लेख में हम इस सुधार, इसके प्रभाव और तैयारी के मुख्य बिंदुओं पर विस्तृत समाचार विश्लेषण देंगे।

UCC (संशोधन) अध्यादेश, 2026 — संवैधानिक अधिकारों के तहत

उत्तराखंड सरकार ने यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को राज्यपाल की स्वीकृति के पश्चात संविधान के अनुच्छेद 213 के तहत लागू किया है। यह अध्यादेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। इस संशोधन के माध्यम से अनेक प्रक्रियात्मक, प्रशासनिक और दंडात्मक सुधार किए गए हैं ताकि UCC अधिनियम, 2024 की प्रभावी और पारदर्शी कार्यान्वयन सुनिश्चित हो सके।

सरकार के अनुसार, इन संशोधनों से पंजीकरण अधिकारों, अपीलीय तंत्रों और दंड प्रावधानों में स्पष्टता आई है तथा उन्हें India के नवीनतम दंड संहिता और अन्य सिविल प्रावधानों के अनुरूप बनाया गया है।

एक वर्ष का परिणाम — “UCC दिवस” का आयोजन

27 जनवरी 2026 को उत्तराखंड में यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड ने एक वर्ष पूर्ण किया और पूरे राज्य में इसे “UCC दिवस” के रूप में मनाया गया। UCC को 27 जनवरी 2025 को लागू किया गया था, और इसने राज्य के सिविल कानून ढांचे को काफी हद तक बदल दिया है।

राज्य सरकार ने इस सुधार को समानता, कानूनी स्पष्टता और नागरिकों के लिए सरल शासन की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है। पिछले एक वर्ष में विवाह, तलाक और सहवास संबंधी प्रक्रियाओं में स्वचालन और सरलता के कारण जनता को सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं।

विवाह पंजीकरण का डिजिटलीकरण और प्रभाव

यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड के लागू होने के बाद सबसे स्पष्ट बदलाव विवाह पंजीकरण के डिजिटलीकरण में आया है। पहले उत्तराखंड में विवाह पंजीकरण उत्तराखंड वैवाहिक पंजीकरण अधिनियम, 2010 के तहत होता था और इसमें पंजीकरण के लिए पंजीयक कार्यालय में शारीरिक उपस्थिति अनिवार्य होती थी।

UCC के अंतर्गत लगभग 100% विवाह पंजीकरण ऑनलाइन किए जा रहे हैं। अब आवेदक और उनके गवाह दस्तावेज़ तथा वीडियो विवरण ऑनलाइन प्रस्तुत कर सकते हैं, जिससे यात्रा और समय दोनों की बचत होती है। लागू वर्ष में अब तक 4.7 लाख से अधिक विवाह पंजीकरण सम्पन्न हो चुके हैं और औसतन पाँच दिनों के भीतर प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं।

सरकार की दृष्टि और सार्वजनिक सहभागिता

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि UCC ने पारदर्शिता और सरलता के माध्यम से जनता का विश्वास जीता है और अन्य राज्यों के लिए एक मॉडल स्थापित किया है। 2026 के संशोधन पंजीकरण शक्तियों, अपीलीय तंत्रों तथा नवीन दंडात्मक प्रावधानों के अनुरूप समायोजन लाते हैं।

यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड के एक वर्ष पूरे होने पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता कार्यक्रम और नागरिक सहभागिता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों को UCC के लाभ, प्रक्रियाएं और अधिकारों के बारे में और अधिक जानकारी देना है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • उत्तराखंड भारत का पहला ऐसा राज्य है जिसने यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड को लागू किया है।
  • UCC को 27 जनवरी 2025 को लागू किया गया था और 27 जनवरी 2026 को एक वर्ष पूरा हुआ।
  • अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल को अध्यादेश जारी करने का अधिकार मिलता है।
  • UCC ने विवाह पंजीकरण और सिविल प्रक्रियाओं को डीजिटलीकरण के जरिए सरल और त्वरित बनाया है।

इस तरह, उत्तराखंड का यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड न केवल कानूनी ढांचे में सुधार ला रहा है बल्कि नागरिकों के रोज़मर्रा के जीवन को भी अधिक सुगम और पारदर्शी बना रहा है।

Originally written on January 28, 2026 and last modified on January 28, 2026.

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