उत्तरकाशी में पहली बार दिखा दुर्लभ पक्षी ‘सिरकीर मल्कोहा’: जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के संकेत

उत्तरकाशी में पहली बार दिखा दुर्लभ पक्षी ‘सिरकीर मल्कोहा’: जलवायु परिवर्तन और जैव विविधता के संकेत

उत्तराखंड के तराई क्षेत्रों में सामान्यतः पाए जाने वाला दुर्लभ पक्षी सिरकीर मल्कोहा (Taccocua leschenaultii) अब पहली बार उत्तरकाशी ज़िले में देखा गया है। यह विकासखंड बारकोट के पास अपर यमुना वन प्रभाग की एक टीम द्वारा इस महीने की शुरुआत में दर्ज किया गया। यह दृश्यावलोकन न केवल क्षेत्र की पक्षी विविधता के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि जलवायु परिवर्तन और आवासीय परिवर्तन के संदर्भ में भी विशेष अध्ययन की माँग करता है।

उच्च हिमालयी क्षेत्र में असामान्य उपस्थिति

सामान्यतः सिरकीर मल्कोहा 1,000 मीटर से नीचे की ऊँचाई वाले शुष्क झाड़ी वनों और खुले वुडलैंड में पाया जाता है।

  • बारकोट क्षेत्र में इसकी उपस्थिति इसके सामान्य आवास व्यवहार से अलग है।
  • इस असामान्य अवलोकन को वन विभाग ने फोटोग्राफिक साक्ष्य के साथ दर्ज किया है।
  • यह हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में संभावित आवासीय परिवर्तन की ओर संकेत करता है।

प्रजाति प्रोफ़ाइल और आवास वरीयता

रेंज ऑफिसर शेखर सिंह राणा के अनुसार, सिरकीर मल्कोहा एक लंबी पूँछ वाला, जैतून-भूरे रंग का पक्षी है जिसकी लाल मुड़ी हुई चोंच इसे अन्य प्रजातियों से अलग बनाती है।

  • यह पक्षी आमतौर पर गोपनीय और शर्मीली प्रकृति का होता है।
  • यह गर्म और निचले इलाकों को प्राथमिकता देता है, जिससे इसकी उत्तरकाशी में उपस्थिति और अधिक उल्लेखनीय बन जाती है।

जलवायु परिवर्तन और अनुसंधान महत्व

विशेषज्ञों के अनुसार, इस पक्षी का ऊँचाई की ओर प्रवास संभवतः जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय बदलावों से जुड़ा हो सकता है।

  • पक्षी प्रजातियाँ आम तौर पर जलवायु परिवर्तन की संवेदनशील जैव-सूचक (bio-indicator) मानी जाती हैं।
  • तापमान और आवासीय संरचना में परिवर्तन का प्रभाव उनके आव्रजन पैटर्न और वितरण पर जल्दी दिखाई देता है।
  • इस तरह की घटनाएँ हिमालयी जैव विविधता और जलवायु अध्ययन में अत्यधिक महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • सिरकीर मल्कोहा (Taccocua leschenaultii) सामान्यतः 1,000 मीटर से कम ऊँचाई पर पाया जाता है।
  • पक्षी जलवायु और पर्यावरण परिवर्तन के महत्वपूर्ण जैव संकेतक होते हैं।
  • उत्तरकाशी हिमालयी जैव विविधता हॉटस्पॉट में आता है।
  • वन विभाग दुर्लभ प्रजातियों का दस्तावेज़ीकरण संरक्षण योजना के लिए करता है।

उत्तरकाशी में पक्षी विविधता का विस्तार

उत्तरकाशी ज़िले में अब तक लगभग 370 पक्षी प्रजातियाँ दर्ज की जा चुकी हैं, जो यहाँ की पारिस्थितिक विविधता का प्रमाण हैं।

  • सिरकीर मल्कोहा का जुड़ना इस सूची को और समृद्ध करता है।
  • यह घटना क्षेत्र में अन्य दुर्लभ या अप्रयुक्त प्रजातियों की उपस्थिति की संभावना को भी इंगित करती है।
  • वन अधिकारियों ने निरंतर निगरानी और आवास संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया है।

यह अवलोकन उत्तरकाशी को पक्षी अध्ययन और हिमालयी पारिस्थितिकी के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण अनुसंधान केंद्र के रूप में स्थापित करने की संभावना को और बल देता है।

Originally written on January 3, 2026 and last modified on January 3, 2026.

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