ई.ए. राजेंद्रन का निधन: मलयालम सिनेमा के दिग्गज कलाकार को श्रद्धांजलि
मलयालम फिल्म उद्योग के वरिष्ठ अभिनेता और निर्देशक ई.ए. राजेंद्रन का 71 वर्ष की आयु में कोल्लम स्थित उनके निवास पर निधन हो गया। लंबे समय से आयु संबंधी बीमारियों से जूझ रहे राजेंद्रन के निधन से मलयालम सिनेमा, टेलीविजन और थिएटर जगत को गहरा आघात पहुंचा है। उनका जीवन कला के प्रति समर्पण और विविध प्रतिभा का प्रतीक रहा।
प्रारंभिक जीवन और कलात्मक शुरुआत
राजेंद्रन का जन्म केरल के त्रिशूर जिले के त्रिथल्लूर में हुआ था। बचपन से ही उन्हें अभिनय में रुचि थी और उन्होंने स्कूल के दिनों में मंच प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा को निखारा। आगे चलकर उन्होंने नई दिल्ली स्थित नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) से अभिनय में प्रथम स्थान के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से टेलीविजन कोर्स किया, जिससे उनके करियर की मजबूत नींव पड़ी।
सिनेमा और टेलीविजन में करियर
ई.ए. राजेंद्रन ने लगभग 60 मलयालम फिल्मों में अभिनय किया, जहां उन्होंने खलनायक और चरित्र भूमिकाओं में अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने वी.आर. गोपीनाथ की फिल्म ‘ग्रीष्मम’ से शुरुआत की और बाद में ‘कलियाट्टम’, ‘प्रणयवर्णंगल’, ‘दया’ और ‘पट्टाभिषेकम’ जैसी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। इसके अलावा, वे टेलीविजन धारावाहिकों में भी सक्रिय रहे और छोटे पर्दे पर भी अपनी छाप छोड़ी।
अभिनय से परे योगदान
राजेंद्रन केवल एक अभिनेता ही नहीं थे, बल्कि एक कुशल थिएटर निर्देशक भी थे। उन्होंने विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में हिस्सा लिया और टेलीविजन प्रोडक्शन से भी जुड़े रहे। इसके अलावा, उन्होंने राज्य बागवानी निगम के अध्यक्ष के रूप में सार्वजनिक जीवन में भी योगदान दिया, जो उनके बहुआयामी व्यक्तित्व को दर्शाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (NSD) भारत का प्रमुख थिएटर प्रशिक्षण संस्थान है।
- फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) पुणे में स्थित है।
- मलयालम फिल्म उद्योग को ‘मॉलीवुड’ कहा जाता है।
- क्षेत्रीय सिनेमा भारत की सांस्कृतिक विविधता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
विरासत और अंतिम विदाई
ई.ए. राजेंद्रन अपने पीछे पत्नी संध्या राजेंद्रन और परिवार को छोड़ गए हैं। उनके पार्थिव शरीर को कोल्लम में श्रद्धांजलि के लिए रखा जाएगा और बाद में त्रिशूर में अंतिम संस्कार किया जाएगा।
उनका योगदान मलयालम सिनेमा, थिएटर और टेलीविजन के क्षेत्र में हमेशा याद किया जाएगा। उनकी कला और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।