ईशा सिंह ने ISSF विश्व चैंपियनशिप में रचा इतिहास
काहिरा में आयोजित ISSF विश्व चैंपियनशिप में भारत की शूटिंग अभियान का समापन शानदार रहा, जब युवा निशानेबाज़ ईशा सिंह ने महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल ओलंपिक स्पर्धा में अपना पहला व्यक्तिगत विश्व चैंपियनशिप कांस्य पदक जीता। इस उपलब्धि ने न केवल उनके करियर में नया अध्याय जोड़ा, बल्कि भारत की समग्र पदक स्थिति को भी मजबूत किया।
ईशा सिंह का शानदार प्रदर्शन
फाइनल में ईशा ने 30 हिट्स के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। स्वर्ण पदक कोरिया की ओलंपिक चैंपियन यांग जीन ने 40 हिट्स के साथ जीता, जबकि चीन की याओ कियानक्सुन ने 38 हिट्स के साथ रजत पदक प्राप्त किया। यह ईशा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी सफलता रही, जिन्होंने इससे पहले वर्ल्ड कप में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया था। यह उपलब्धि उनके आगामी ISSF वर्ल्ड कप फाइनल्स, दोहा में भागीदारी से पहले आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है।
क्वालिफिकेशन और फाइनल की रोमांचक जंग
क्वालिफिकेशन चरण में ईशा ने 587 और मनु भाकर ने 586 अंकों के साथ शीर्ष आठ में जगह बनाई। ईशा पाँचवें और मनु छठे स्थान पर रहते हुए फाइनल में पहुँचीं। फाइनल राउंड बेहद रोमांचक रहा, जिसमें ईशा ने शुरुआती राउंड से ही स्थिर प्रदर्शन किया और फ्रांस की लामोल मैथिल्ड को पछाड़ते हुए कांस्य पर कब्ज़ा जमाया। मनु आठवें सीरीज़ में बाहर हुईं और चौथे स्थान पर रहीं।
भारत का ऐतिहासिक प्रदर्शन
भारत ने इस चैंपियनशिप में ओलंपिक स्पर्धाओं में कुल 1 स्वर्ण, 4 रजत और 2 कांस्य पदक जीतकर अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। समग्र रूप से भारत 3 स्वर्ण, 5 रजत और 4 कांस्य पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा, जबकि चीन और कोरिया पहले दो स्थानों पर रहे। अन्य भारतीय निशानेबाज़ जैसे राही सरनोबत, चैन सिंह, अखिल श्योराण और समरवीर सिंह ने भी शानदार प्रदर्शन किया, परंतु मामूली अंतर से पदक से चूक गए।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- ईशा सिंह ने काहिरा 2025 में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल ओलंपिक स्पर्धा में कांस्य पदक जीता।
- स्वर्ण पदक यांग जीन (कोरिया, 40 हिट्स) और रजत याओ कियानक्सुन (चीन, 38 हिट्स) को मिला।
- भारत कुल पदक तालिका में तीसरे स्थान पर रहा (3 स्वर्ण, 5 रजत, 4 कांस्य)।
- ईशा (587) और मनु भाकर (586) दोनों ने फाइनल के लिए क्वालिफाई किया।
आगे की राह और भारतीय निशानेबाज़ी की उपलब्धि
ईशा की यह सफलता भारतीय महिला निशानेबाज़ों की निरंतर उभरती प्रतिभा का प्रतीक है। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच उनका संयम और सटीक निशाना भारत की नई शूटिंग पीढ़ी के आत्मविश्वास को दर्शाता है। यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत स्तर पर महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि भारत वैश्विक निशानेबाज़ी में अब स्थायी रूप से शीर्ष पायदानों पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है।