ईरान में सैन्य हमलों से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों को नुकसान

ईरान में सैन्य हमलों से यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों को नुकसान

हाल ही में अमेरिका और इज़राइल के सैन्य हमलों के बाद ईरान के कई ऐतिहासिक स्मारकों और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों को नुकसान पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि मिसाइलें सीधे इन सांस्कृतिक स्थलों पर नहीं गिरीं, लेकिन आसपास हुए विस्फोटों से उत्पन्न झटकों और गिरते मलबे के कारण कई नाजुक स्थापत्य संरचनाएं प्रभावित हुईं। इन प्रभावों से कांच की खिड़कियां, सजावटी टाइलें और पत्थर की संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गईं।

यूनेस्को स्थलों को हुआ संरचनात्मक नुकसान

यूनेस्को ने पुष्टि की है कि कम से कम चार महत्वपूर्ण सांस्कृतिक स्थलों को सैन्य कार्रवाई के कारण क्षति पहुंची है। इनमें तेहरान स्थित क़ाजार कालीन गोलिस्तान पैलेस भी शामिल है, जो अपनी भव्य वास्तुकला, शीशे से सजे हॉल, सजावटी टाइलों और ऐतिहासिक उद्यानों के लिए प्रसिद्ध है। विस्फोटों के प्रभाव से महल की कई खिड़कियां टूट गईं, मेहराबों को नुकसान पहुंचा और प्रसिद्ध शीशे की छतों के कुछ हिस्से भी टूट गए। इसके अलावा इस्फहान का चेहेल सुतून पैलेस, जो 17वीं शताब्दी का एक महत्वपूर्ण स्मारक है, तथा मस्जिद-ए जामे भी प्रभावित हुए हैं। मस्जिद-ए जामे ईरान की सबसे प्राचीन शुक्रवार मस्जिदों में से एक है और फारसी इस्लामी वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।

खोर्रमाबाद घाटी के पास भी नुकसान

अधिकारियों ने खोर्रमाबाद घाटी के आसपास स्थित संरचनाओं को भी नुकसान पहुंचने की जानकारी दी है। यह क्षेत्र कई प्रागैतिहासिक गुफाओं और शैलाश्रयों के लिए प्रसिद्ध है, जो लगभग 63,000 ईसा पूर्व से मानव बस्तियों के प्रमाण प्रदान करते हैं। पश्चिमी ईरान का यह क्षेत्र महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों में गिना जाता है। यहां हुई मामूली क्षति भी संरक्षण विशेषज्ञों के लिए चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि इन स्थलों का ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व अत्यंत अधिक है।

वैश्विक स्तर पर चिंता

इन घटनाओं ने आधुनिक युद्ध के दौरान सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने कहा कि युद्ध की स्थिति में नागरिकों के साथ-साथ नागरिक बुनियादी ढांचे और ऐतिहासिक धरोहरों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ईरान के अधिकारियों ने इस नुकसान की निंदा करते हुए इसे देश की सभ्यता के प्रतीकों पर हमला बताया है। वहीं यूनेस्को ने कहा कि संघर्ष शुरू होने से पहले ही संरक्षित विरासत स्थलों के भौगोलिक निर्देशांक संबंधित पक्षों को उपलब्ध करा दिए गए थे ताकि उन्हें नुकसान से बचाया जा सके।

आधुनिक युद्ध और सांस्कृतिक धरोहर पर खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध में उन्नत हथियारों और बड़े पैमाने पर बमबारी के कारण सांस्कृतिक धरोहरों के लिए खतरा लगातार बढ़ रहा है। कई बार ऐतिहासिक स्थलों को सीधे निशाना नहीं बनाया जाता, लेकिन विस्फोटों के झटके और मलबा भी नाजुक संरचनाओं को गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त कर सकता है। ईरान में लगभग 30 स्थल यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। वर्तमान में संरक्षण एजेंसियां इन स्थलों को हुए नुकसान का आकलन कर रही हैं और उनके पुनर्स्थापन के उपायों पर विचार कर रही हैं।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल वे स्थान होते हैं जिन्हें मानवता के लिए विशेष सांस्कृतिक या प्राकृतिक महत्व के कारण मान्यता दी जाती है।
  • तेहरान का गोलिस्तान पैलेस क़ाजार काल का एक शाही परिसर है और यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल है।
  • इस्फहान का चेहेल सुतून पैलेस अपने फारसी उद्यान शैली और सफ़वीद वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है।
  • इस्फहान की मस्जिद-ए जामे ईरान की सबसे पुरानी मस्जिदों में से एक है और इस्लामी वास्तुकला के विकास का महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जाती है।

इन ऐतिहासिक स्थलों को हुआ नुकसान यह दर्शाता है कि आधुनिक संघर्षों में सांस्कृतिक धरोहरें कितनी संवेदनशील हो सकती हैं। इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए इन अमूल्य स्मारकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।

Originally written on March 13, 2026 and last modified on March 13, 2026.

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