ईरान के हमलों की निंदा वाले संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव का भारत ने किया समर्थन

ईरान के हमलों की निंदा वाले संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव का भारत ने किया समर्थन

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव का सह-प्रायोजन किया है जिसमें ईरान द्वारा खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों और जॉर्डन पर किए गए हमलों की निंदा की गई है। इस प्रस्ताव में तुरंत शत्रुता समाप्त करने की मांग की गई है और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकियों के खिलाफ चेतावनी दी गई है। यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक स्थिति और खाड़ी क्षेत्र में उसके रणनीतिक हितों को दर्शाता है।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव पारित किया

15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस प्रस्ताव को 13 मतों के समर्थन से पारित किया, जबकि किसी सदस्य ने इसका विरोध नहीं किया। चीन और रूस ने मतदान से दूरी बनाए रखी और मतदान में भाग नहीं लिया। उस समय परिषद की अध्यक्षता संयुक्त राज्य अमेरिका के पास थी। प्रस्ताव में ईरान द्वारा बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन के क्षेत्रों पर किए गए हमलों को “गंभीर और निंदनीय” बताया गया। इसमें कहा गया कि ऐसी कार्रवाइयां अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं और वैश्विक शांति व सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।

खाड़ी क्षेत्र में भारत के रणनीतिक हित

भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार इस प्रस्ताव का समर्थन क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारत की नीति के अनुरूप है। खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं। इसके अलावा भारत की ऊर्जा सुरक्षा भी इस क्षेत्र पर काफी हद तक निर्भर करती है। खाड़ी देशों से भारत को बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस प्राप्त होती है। इसलिए क्षेत्र में शांति और स्थिरता भारत के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए आवश्यक है।

हमलों को तुरंत रोकने की मांग

प्रस्ताव में ईरान से मांग की गई है कि वह जीसीसी देशों और जॉर्डन के खिलाफ सभी प्रकार के हमलों को तुरंत बंद करे। साथ ही ईरान से पड़ोसी देशों के खिलाफ उकसावे वाली गतिविधियों और क्षेत्र में प्रॉक्सी समूहों के उपयोग से भी बचने का आग्रह किया गया है। प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के प्रति समर्थन दोहराया गया है।

व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन

बहरीन के नेतृत्व में लाए गए इस प्रस्ताव को व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन प्राप्त हुआ। लगभग 135 देशों ने इसे सह-प्रायोजित किया। प्रस्ताव का समर्थन करने वाले देशों में अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा सहित कई एशियाई और यूरोपीय देश शामिल हैं। यह पहल पश्चिम एशिया में तनाव कम करने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के संयुक्त प्रयास को दर्शाती है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं, जिनमें पाँच स्थायी सदस्य वीटो अधिकार रखते हैं।
  • खाड़ी सहयोग परिषद में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल परिवहन मार्गों में से एक है।
  • खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं और यह क्षेत्र भारत के लिए ऊर्जा आयात का प्रमुख स्रोत है।

इस प्रकार संयुक्त राष्ट्र में इस प्रस्ताव का समर्थन भारत की उस नीति को दर्शाता है जिसमें वह पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन को महत्व देता है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यह कदम भारत के कूटनीतिक संतुलन और रणनीतिक हितों की रक्षा को भी दर्शाता है।

Originally written on March 13, 2026 and last modified on March 13, 2026.

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