इस्लामाबाद न्यायिक परिसर के बाहर आत्मघाती धमाका: बढ़ती असुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव
11 नवंबर 2025 को इस्लामाबाद के डिस्ट्रिक्ट ज्यूडिशियल कॉम्प्लेक्स के बाहर हुए शक्तिशाली आत्मघाती विस्फोट ने पाकिस्तान की राजधानी को गहरे सदमे में डाल दिया। यह हमला, 2008 के बाद इस्लामाबाद में सबसे भीषण माना जा रहा है, जिसमें बारह लोगों की मृत्यु और बीस से अधिक लोग घायल हुए। इस घटना ने देशभर में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएँ उत्पन्न कर दी हैं और राजनीतिक तथा कूटनीतिक तनावों को और तेज कर दिया है।
घटना स्थल और हमले की प्रकृति
विस्फोट दोपहर लगभग 12.30 बजे सेक्टर G-11 स्थित डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस कोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार पर हुआ। यह स्थान प्रतिदिन वकीलों, वादकारियों और अधिकारियों से भरा रहता है, जिससे यहां सुरक्षा की चुनौती स्वाभाविक रूप से अधिक रहती है। पुलिस के अनुसार, हमलावर परिसर में प्रवेश करने में असफल होने के बाद लगभग पाँच किलोग्राम विस्फोटक सामग्री के साथ खुद को उड़ा लिया। सीसीटीवी फुटेज में हमलावर को गेट के पास घूमते हुए और पुलिस वाहन के नज़दीक आते ही विस्फोट करते हुए देखा गया।
जांच और प्रारंभिक निष्कर्ष
जांचकर्ताओं का मानना है कि हमलावर इस्लामाबाद के बाहर से आया था और घटना से कुछ दिन पहले ही शहर पहुँचा। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि वह मोटरसाइकिल पर अदालत परिसर पहुँचा और अपने शरीर पर चादर के नीचे विस्फोटक छिपाकर चला। अधिकारियों ने हमलावर की गतिविधियों का पता लगाने के लिए 90 से अधिक सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए हैं और उनमें से कई को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से विश्लेषित किया जा रहा है। विस्फोटक सामग्री में बॉल बेयरिंग शामिल थे, जिससे इसकी मारक क्षमता और बढ़ गई।
जिम्मेदारी का दावा
हमले की जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के एक अलग-थलग गुट जमात-उल-अहरार (JuA) ने ली है। 2014 में बने इस संगठन की गतिविधियाँ अफगानिस्तान के नंगरहार प्रांत से संचालित मानी जाती हैं। यह समूह पहले भी कई बड़े हमलों में शामिल रहा है, जिनमें 2015 में पंजाब के एक मंत्री की हत्या और 2016 का लाहौर पार्क विस्फोट प्रमुख हैं। नागरिकों, सुरक्षा बलों और सरकारी संस्थानों को निशाना बनाना इस संगठन की रणनीति का हिस्सा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और कूटनीतिक प्रभाव
हमले के बाद पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। वरिष्ठ मंत्रियों ने हमले के जिम्मेदारों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का संकेत दिया है। कई आरोप अफगानिस्तान के भीतर मौजूद तत्वों की ओर निर्देशित किए गए, जिससे दोनों देशों के पहले से तनावपूर्ण संबंध और बिगड़ रहे हैं। इसी बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री द्वारा भारतीय समर्थित तत्वों की संलिप्तता के आरोपों को नई दिल्ली ने खारिज कर दिया। इस घटना ने क्षेत्रीय राजनीति में नए विवादों को जन्म दिया है, जबकि पाकिस्तान पहले ही गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- जमात-उल-अहरार (JuA) वर्ष 2014 में टीटीपी से अलग होकर बना एक गुट है।
- यह हमला 2008 के मैरियट होटल विस्फोट के बाद इस्लामाबाद में सबसे भीषण माना गया।
- हमलावर द्वारा उपयोग किया गया विस्फोटक लगभग 4–5 किलोग्राम था और इसमें बॉल बेयरिंग शामिल थे।
- न्यायिक परिसर पाकिस्तान के प्रमुख संघीय भवनों से लगभग 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
इस घटना से स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान को अपनी आंतरिक सुरक्षा प्रणाली, आतंकवाद निरोधक उपायों और क्षेत्रीय कूटनीति पर अधिक मजबूत रणनीति अपनाने की आवश्यकता है। बढ़ते हमलों ने न केवल आम नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डाला है, बल्कि दक्षिण एशिया में स्थिरता को भी नई चुनौतियों के सामने ला दिया है।