इसरो का विस्तारशील अंतरिक्ष अभियान: चंद्रयान-4 से स्पेस स्टेशन तक
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) आने वाले वर्षों में अभूतपूर्व गतिविधियों के लिए तैयार हो रहा है। जहां एक ओर भारत के पहले चंद्र नमूना-वापसी मिशन चंद्रयान-4 को मंज़ूरी मिल चुकी है, वहीं दूसरी ओर देश का स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन और मानवयुक्त अभियान भी इसरो की दीर्घकालिक योजनाओं का केंद्र बन चुके हैं।
चंद्रयान-4: भारत का पहला नमूना-वापसी मिशन
सरकार द्वारा अनुमोदित चंद्रयान-4 मिशन का प्रक्षेपण वर्ष 2028 में प्रस्तावित है। यह भारत का अब तक का सबसे जटिल चंद्र मिशन होगा, जिसमें चंद्र सतह से मिट्टी और पत्थरों के नमूने पृथ्वी पर लाने का प्रयास किया जाएगा। अब तक यह उपलब्धि केवल अमेरिका, रूस और चीन को ही हासिल हुई है। इस मिशन में उन्नत लैंडिंग, आरोहण और वापसी प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा, जिससे भारत गहरे अंतरिक्ष अभियानों में अग्रणी देशों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा।
व्यस्त प्रक्षेपण वर्ष और उद्योग विस्तार
वित्त वर्ष 2025–26 में इसरो सात अतिरिक्त प्रक्षेपणों की योजना बना रहा है, जिनमें PSLV और GSLV मिशन शामिल हैं। एक प्रमुख आकर्षण होगा पूरी तरह भारतीय उद्योग द्वारा निर्मित पहला PSLV रॉकेट। बढ़ती मांग को देखते हुए इसरो अगले तीन वर्षों में अपने अंतरिक्ष यान निर्माण की क्षमता को तीन गुना करने की योजना पर कार्य कर रहा है। निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी अब लॉन्च सेवाओं और निर्माण दोनों में स्पष्ट दिखाई दे रही है।
गगनयान और भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की रूपरेखा
भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन गगनयान वर्ष 2027 में प्रक्षेपित होने की योजना पर कायम है, जिसके पहले तीन मानवरहित परीक्षण उड़ानें होंगी।साथ ही, इसरो ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Indian Space Station) पर कार्य प्रारंभ कर दिया है, जो 2035 तक पूरी तरह संचालित होगा। इसके पहले पांच मॉड्यूल में से पहला मॉड्यूल 2028 में कक्षा में भेजा जाएगा। यह दीर्घकालिक योजना भारत की 2040 तक अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्र सतह पर भेजने की महत्वाकांक्षा के अनुरूप है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- चंद्रयान-4 मिशन 2028 में भारत का पहला चंद्र नमूना-वापसी अभियान होगा।
- गगनयान मानवयुक्त मिशन 2027 में प्रस्तावित है।
- भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल 2028 में और संपूर्ण स्टेशन 2035 तक स्थापित होगा।
- भारत का लक्ष्य 2030 तक वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अपनी हिस्सेदारी 2% से बढ़ाकर 8% करना है।
उभरती अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और निजी क्षेत्र की भूमिका
भारत की वर्तमान अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लगभग 8.2 अरब डॉलर की है, जो 2033 तक 44 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। 2020 के बाद लागू सुधारों से निजी क्षेत्र को खुली भागीदारी का अवसर मिला, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 450 से अधिक उद्योग और 330 से अधिक स्टार्टअप इस क्षेत्र में सक्रिय हैं।चंद्रयान-4, गगनयान और जापान के साथ संयुक्त LUPEX मिशन जैसे प्रोजेक्ट भारत के अंतरिक्ष प्रयासों को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दे रहे हैं।