इंदौर के भागीरथपुरा में जलजनित रोग का प्रकोप बना महामारी, 10 लोगों की मौत
मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में जलजनित रोगों का अचानक बढ़ा हुआ प्रकोप अब महामारी का रूप ले चुका है। अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जिसके बाद जिला प्रशासन ने इसे औपचारिक रूप से महामारी घोषित कर दिया है। इस घोषणा के बाद केंद्रीय और राज्य एजेंसियों की विशेष टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और रोग के स्रोत और नियंत्रण पर कार्य प्रारंभ कर चुकी हैं।
महामारी की घोषणा और स्वास्थ्य संबंधी आधार
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी माधव हसानी ने बताया कि अब रोग के मामले सामान्य स्तर से कहीं अधिक हो गए हैं, जिससे यह स्थिति तकनीकी रूप से महामारी की परिभाषा में आती है।
विशेषज्ञ टीमें रोग के स्रोत की पहचान करने के लिए जुटी हैं — यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या जल में विषाणु या बैक्टीरिया का संक्रमण किसी एक ही स्थान से फैला है या कई स्रोतों से।
बहु-एजेंसी टीमें जांच में जुटीं
जिला कलेक्टर शिवम वर्मा की अध्यक्षता में स्मार्ट सिटी कार्यालय में एक उच्च स्तरीय समन्वय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक के बाद ICMR (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद), NCDC (राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र) और राज्य की निगरानी इकाइयों के विशेषज्ञों को तैनात किया गया।
इन वैज्ञानिकों ने क्षेत्र में उन्नत तकनीकों से यादृच्छिक जल नमूने एकत्र किए, जिससे यह स्पष्ट किया जा सके कि कौन-से जीवाणु इस रोग के लिए जिम्मेदार हैं। जब तक जल आपूर्ति प्रणाली की पूर्ण सुरक्षा की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक नर्मदा जल आपूर्ति को निलंबित कर दिया गया है।
स्थानीय स्तर पर नियंत्रण उपाय
भागीरथपुरा क्षेत्र को 32 परिचालन बीट्स में विभाजित कर विशेष निगरानी की जा रही है। इन बीट्स में विशेष टीमें सरकारी और निजी बोरवेल की क्लोरीनीकरण प्रक्रिया सुनिश्चित कर रही हैं।
निवासियों को निर्देश दिया गया है कि वे बेसमेंट के जल भंडारण टैंकों को पूरी तरह से खाली कर, उन्हें साफ कर, पेशेवर तरीके से क्लोरीनेट कर पुनः उपयोग करें। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि गुइलैन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome) जैसी किसी भी न्यूरोलॉजिकल बीमारी का कोई प्रमाण नहीं मिला है, और अफवाहों से बचने की अपील की है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
- महामारी तब घोषित की जाती है जब किसी रोग के मामले किसी क्षेत्र में सामान्य स्तर से अधिक हो जाते हैं।
- भागीरथपुरा में नर्मदा जल आपूर्ति अस्थायी रूप से निलंबित की गई है।
- ICMR और NCDC भारत में रोग की निगरानी और महामारी की जांच में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
- क्लोरीनीकरण (Chlorination) जलजनित रोगों के नियंत्रण का प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य उपाय है।
चिकित्सा सहायता और सतत निगरानी
प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल टैंकरों के माध्यम से वितरित कर रहा है और घर-घर जाकर क्लोरीन ड्रॉप्स बांट रहा है। बहु-विभागीय टीमें घर-घर सर्वेक्षण कर रही हैं और इंदौर के अन्य क्षेत्रों में भी रैंडम सैंपलिंग की जा रही है जहां जल गुणवत्ता की शिकायतें सामने आई हैं।
प्रभावित मरीजों को निशुल्क उपचार, दवाएं और इंजेक्शन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जो विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में हो रहा है। प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि संक्रमण को और फैलने से रोका जा सके।
यह प्रकोप नागरिकों के लिए एक चेतावनी है कि स्वच्छ जल और जलस्रोतों की सुरक्षा किस कदर महत्वपूर्ण है, और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत करना कितना आवश्यक है।