इंडियन सॉफ्टशेल कछुआ: अवैध तस्करी से जूझती एक संवेदनशील प्रजाति

इंडियन सॉफ्टशेल कछुआ: अवैध तस्करी से जूझती एक संवेदनशील प्रजाति

ग्रेटर नोएडा में हाल ही में पुलिस ने नियमित जांच के दौरान 16 इंडियन सॉफ्टशेल कछुओं को बचाया, जिससे देश में अवैध वन्यजीव व्यापार की गंभीर समस्या एक बार फिर उजागर हुई है। यह प्रजाति पहले से ही संकट में है और इसके संरक्षण के लिए कड़े कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। इस तरह की घटनाएं जलीय जैव विविधता की सुरक्षा की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती हैं।

इंडियन सॉफ्टशेल कछुआ का परिचय

इंडियन सॉफ्टशेल कछुआ, जिसका वैज्ञानिक नाम निल्सोनिया गैंगेटिका है, दुनिया के सबसे बड़े मीठे पानी के कछुओं में से एक है। इसका खोल गोल या अंडाकार होता है, जो हरे रंग का होता है और किनारों पर पीले रंग की सीमा होती है। इसकी लंबी गर्दन और नली जैसी नाक इसे पानी के अंदर रहते हुए भी आसानी से सांस लेने में सक्षम बनाती है। इसका मुलायम और लचीला खोल इसे तेज गति से तैरने में मदद करता है।

आवास और वितरण

यह कछुआ मुख्य रूप से मीठे पानी के स्रोतों जैसे नदियों, झीलों, तालाबों और नहरों में पाया जाता है। यह गंदले और गहरे पानी को पसंद करता है, जहां यह रेत या कीचड़ में छिपकर लंबे समय तक रह सकता है। इसका वितरण भारत के अलावा अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान तक फैला हुआ है। भारत में यह गंगा, ब्रह्मपुत्र, यमुना, नर्मदा और महानदी जैसी प्रमुख नदी घाटियों में पाया जाता है।

आहार और पारिस्थितिक भूमिका

इंडियन सॉफ्टशेल कछुआ सर्वाहारी होता है। यह मछलियां, उभयचर, कीट, घोंघे, मृत जीव (कैरीयन) और जलीय पौधों का सेवन करता है। यह जल पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका प्रजनन काल आमतौर पर फरवरी से अप्रैल के बीच होता है। कुछ क्षेत्रों, विशेषकर ओडिशा में, इसे पवित्र माना जाता है और मंदिरों के तालाबों में संरक्षण दिया जाता है।

खतरे और संरक्षण स्थिति

यह प्रजाति कई खतरों का सामना कर रही है, जिनमें आवास का नष्ट होना, जल प्रदूषण, कृषि विस्तार और अवैध शिकार शामिल हैं। इसके मांस और पारंपरिक चिकित्सा में उपयोग के कारण इसकी तस्करी की जाती है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने इसे “संकटग्रस्त” श्रेणी में रखा है। भारत में इसे वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 के तहत सर्वोच्च संरक्षण प्राप्त है, लेकिन इसके बावजूद अवैध व्यापार इसके अस्तित्व के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ है।

खबर से जुड़े जीके तथ्य

  • इंडियन सॉफ्टशेल कछुआ का वैज्ञानिक नाम निल्सोनिया गैंगेटिका है।
  • यह आईयूसीएन रेड लिस्ट में “संकटग्रस्त” (Endangered) श्रेणी में शामिल है।
  • इसे भारत में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में रखा गया है।
  • यह गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु जैसी प्रमुख नदी प्रणालियों में पाया जाता है।

इंडियन सॉफ्टशेल कछुए की यह घटना केवल एक बचाव अभियान नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि हमें अपने जलीय जीवों और पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए और अधिक सख्त कदम उठाने होंगे।

Originally written on April 10, 2026 and last modified on April 10, 2026.

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